शास्त्रीय संगीत और तबला जुगलबंदी से जीवंत हुई गुरु-शिष्य परंपरा

धार। गुरु पूर्णिमा पर्व के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश शासन संस्कृति विभाग के सौजन्य से शासकीय संगीत महाविद्यालय धार द्वारा ’ ‘संगीत सभा ‘’ आयोजित कि गयी, संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित शासकीय संगीत महाविद्यालय धार का आयोजन शा.ललित कला महाविद्यालय घोड़ा चौपाटी धार के सभागार में किया गया । कार्यक्रम का उद्देश्य गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान, कृतज्ञता प्रकट करना, भारतीय संगीत की सांस्कृतिक विरासत की निरंतरता, कला संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपराओं से जोडऩा एवं गुरु की महानता के प्रति सांस्कृतिक चेतना का संवर्धन करना रहा।

घोड़ा चौपाटी स्थित शासकीय ललित कला महाविद्यालय में आयोजित संगीत संध्या ने संगीत एवं कला प्रेमियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गुरु-शिष्य परंपराओं की अनुपम अनुभूति कराई। कार्यक्रम का शुभारंभ आमंत्रित अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती कांति तिर्की ने उपस्थित अतिथियों का पुष्पमालाओं से आत्मीय स्वागत किया। संध्या सभा में गुरु के प्रति आदर व कृतज्ञता प्रकट करने के लिए महाविद्यालय के समस्त शिक्षकों का, पुष्पमालाओं से सम्मान छात्र-छात्राओं द्वारा किया गया।

कार्यक्रम का आगाज़ महाविद्यालय के गुरुजनों के निर्देशन में छात्र-छात्राओं ने गुरु की महिमा व महानता को प्रकट करते हुए गुरु वंदना गाकर किया। इनके साथ तबले पर संगत महाविद्यालय के छात्र श्री गजेन्द्र वामन एवं हारमोनियम पर श्री उर्मिलेश बैरागी ने सुंदर ढंग से संगत की। संगीत सभा की पहली प्रस्तुति में भोपाल के श्री सौरभ शर्मा ने अपने सुमधुर सुरों में आध्यात्मिकता और गुरु भक्ति के स्वरों से शाम को सजाया। उन्होंने अपनी सुरमई प्रस्तुति की शुरुआत राग पूरिया कल्याण में विलंबित खयाल ’भज ले हरि नाम.’से किया ,जो कि एक ताल में निबद्ध था साथ ही तीन ताल में छोटा ख्याल ’लाखों में एक चुन-चुन बुलावे’तथा राग शुद्ध कल्याण में द्रुत एकताल में गुरु की महिमा पर बंदिश ’गुरु ही एक गुण आधार’.गाकर गुरु की वंदना की और अंत में मिश्र राग में ’ठुमरी’ ’सजनवा तुम क्या जानो प्रीत’प्रस्तुत किया।

 

 

उनकी गायकी में रागों की शास्त्रीय गंभीरता और भावों की सहज अभिव्यक्ति श्रोताओं को एक विशिष्ट संगीतानुभूति प्रदान कर रही थी। साथ ही तबला और हारमोनियम एवं सारंगी की अर्थपूर्ण संगत से लय और स्वर का अद्भुत समन्वय परिलक्षित हुआ। अपनी प्रस्तुति का भावपूर्ण समापन भक्ति, माधुर्य और गुरु-परंपरा के प्रति उनकी श्रद्धा का सुंदर प्रतीक था। इस संगीत संध्या में उनके साथ हारमोनियम पर श्री उदित नारायण तिवारी, तबले पर श्री उत्कर्ष तिवारी, सारंगी पर मोहम्मद शिरीन और तानपुरे पर श्री भूपेंद्र ढोके संगत कर रहे थे।

तत्पश्चात कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति में शा.संगीत महाविद्यालय मंदसौर के सुप्रसिद्ध युवा तबला वादक श्री निशांत शर्मा व उनके शिष्य श्री नयन चौहान की तबला-जुगलबंदी ने गुरु शिष्य-परंपरा का अद्भुत समन्वय एवं सांस्कृतिक सौंदर्य से माहौल को ताल व लयानंद से सराबोर कर दिया। श्री निशांत शर्मा अपने गुरु फर्रुखाबाद घराने के प्रसिद्ध तबला वादक स्व. पं. शंकर घोष जी के शिष्य, गुरु परंपरा का निर्वाह करते हुए इस घराने के प्रसिद्ध युवा तबला वादक हैं। उन्होंने विभिन्न लयों में तबला वादन कर दर्शकों को लय और ताल की अद्भुत अनुभूति कराई। उन्होंने अपने तबला वादन की शुरुआत प्रसिद्ध तीन ताल विलंबित लय में ’उठान , पेशकार , पारंपरिक फर्रुखाबाद और अजराड़ा घरानों के कायदे प्रस्तुत किये एवं मध्य लय में फर्रुखाबाद घराने के शैली की ’रौ’ एवं ’अंगुस्ताना’ बहुत ही सुंदर लयकारी के साथ प्रस्तुत कि। द्रुत लय में ’पारंपरिक गत, टुकड़ा, चक्करदार तिहाई, लग्गी-लड़ी’ इत्यादि का तबला वादन में अद्भुत प्रदर्शन कर अपने वादन को विराम दिया। हारमोनियम पर लहरा-श्री ऐश्वर्य देशमुख ने बहुत ही सुंदर ढंग से दिया।

गुरु की महिमा व महानता को दर्शाती हुई इन संगीत प्रस्तुतियों ने जीवन में गुरु के महत्व को रेखांकित किया। शास्त्रीय गायन और तबला जुगलबंदी की मनमोहक प्रस्तुतियों ने गुरु शिष्य-परंपरा को और भी जीवंत कर दिया। स्वर-लय-ताल और भक्ति-भाव सौंदर्य के अद्भुत समन्वय से सुसज्जित यह प्रस्तुतियां भारतीय शास्त्रीय संगीत की सांस्कृतिक परंपरा, रस सौंदर्य और आध्यात्मिक संवेदना का अनुपम उत्सव सिद्ध होता नजर आयी। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट तबला वादन एवं गायन प्रस्तुतियों ने वातावरण को कला-साधना और सांस्कृतिक सौंदर्य से सराबोर कर दिया।गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित यह संध्या भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं कलाओं की समृद्ध विरासत, सृजनात्मकता और सांस्कृतिक मूल्यों व गुरु-शिष्य परंपराओं, गुरु की महानता के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुई, कार्यक्रम में सभी प्रस्तुतियों के अंत में कलाकारों का स्वागत-सत्कार व सम्मान महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती कांति तिर्की द्वारा शॉल-श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन श्रीमती प्रिया शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम में शा.संगीत तथा शा.ललित महाविद्यालय के समस्त विद्यार्थीगण, स्टाफ सदस्य-श्री सोमत सिंह, श्री रविंद्र डोडवे,श्रीमती शशि चौधरी, श्री देशराज वशिष्ठ,श्री मनीष खसरावल,श्री प्रेम सिंह सिकरवार, श्री दुर्गेश बिरथरे, श्री नवनीत लोकरे,श्री भूपेंद्र सिंह चौहान, श्रीमती नंदिनी खरमले, श्री उदय ,पियूष ,पवन ,गोपाल,गिरधारी, सुधि श्रोताओं एवं विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठ संगीतज्ञ श्री लक्ष्मीकांत जोशी जी, श्रीमती वृषाली देशमुख, श्री गौरव मालक,श्री दीपक खलतकर एवं दर्शक दीर्घा में प्रमुख रूप से श्री अतुल कालभवर, श्री महेश कुमार अग्रवाल, डॉ. हेमंत जायसवाल, डॉ.बिट्टो जोशी, श्रीमती मेघा वाडकर, श्री आशीष शर्मा तथा शहर के गणमान्य दर्शक व श्रोतागण बड़ी संख्या में उपस्थित थे। दर्शकों एवं श्रोताओं द्वारा तालियों की गडग़ड़ाहट से कार्यक्रम प्रस्तुतियों को बहुत सराहा गया।

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