घर में बिल्ली, सड़क पर कुत्ते… शहर में जानवरों के हमले से कोई स्थान सुरक्षित नहीं

इंदौर: शहर में जानवरों के हमलों का खतरा अब सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रह गया है. बाहर निकलते ही स्ट्रीट डॉग के हमले का डर है तो घर और आसपास के इलाकों में बिल्ली के काटने की घटनाएं भी लोगों को अस्पताल पहुंचा रही हैं. स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़े बताते हैं कि कुत्तों के अलावा बिल्ली, बंदर और चूहों के हमले भी लगातार सामने आ रहे हैं. यानी इंदौरवासी न घर में पूरी तरह सुरक्षित हैं और न ही सड़क पर.

स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड बता रहे हैं कि एनिमल बाइट के पिछले दिनों 4 हजार 930 मामले दर्ज हुए हैं, इनमें सबसे बड़ा खतरा डॉग बाइट का है. कुत्तों के हमले में 4 हजार 349 लोग प्रभावित हुए हैं. इनमें 2 हजार 633 पुरुष, 851 महिलाएं और 865 बच्चे शामिल हैं. आंकड़े बताते हैं कि हर उम्र के लोग स्ट्रीट डॉग के हमलों का शिकार हो रहे हैं. डॉग बाइट के बाद सबसे ज्यादा चिंता कैट बाइट के मामलों को लेकर है. बिल्ली के काटने के 361 मामले सामने आए हैं. इनमें 167 पुरुष, 124 महिलाएं और 70 बच्चे शामिल हैं.

यह आंकड़े इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि बिल्ली के काटने को कई लोग सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि समय पर उपचार नहीं लेने पर संक्रमण का खतरा बना रहता है. जानवरों के हमलों की सूची में बंदर और चूहे भी पीछे नहीं हैं. बंदर के काटने के 73 मामलों में 26 पुरुष, 29 महिलाएं और 18 बच्चे प्रभावित हुए हैं. वहीं चूहों के काटने के 128 मामले सामने आए हैं, जिनमें 73 पुरुष, 43 महिलाएं और 12 बच्चे शामिल हैं. आंकड़ें बता रहे हैं कि पुरुषों की संख्या 2 हजार 906, महिलाओं की संख्या 1 हजार 50 और बच्चों की संख्या 974 रही है. यह स्थिति बताती है कि एनिमल बाइट अब सिर्फ किसी एक क्षेत्र या वर्ग की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती बन रही है.

घरों के आसपास बढ़ा कैट बाइट का खतरा…
सड़क पर आवारा कुत्तों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन कैट बाइट के आंकड़े एक नए खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं. घरों के आसपास रहने वाली बिल्लियों के हमले भी लोगों को एंटी रैबीज उपचार तक पहुंचा रहे हैं. खासकर बच्चे खेलते समय या जानवरों के करीब जाने पर ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं.

खतरे को रोका जा सकते है…
किसी भी जानवर के काटने के बाद उसे सामान्य नहीं लेना चाहिए. घाव छोटा होने पर भी तुरंत उपचार जरूरी है. समय पर एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने से संक्रमण के खतरे को रोका जा सकता है. बच्चों के मामलों में विशेष सावधानी रखने की जरूरत होती है.
डॉ. आरके पटेल, लाल अस्पताल

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