
जबलपुर। जंगली हाथियों के संबंध में दायर याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशानुसार वन्यजीव के संरक्षण के संबंध में गाइडलाइन बनाने के निर्देश दिये है। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 6 माह बाद निर्धारित की है।
रायपुर निवासी नितिन सिंघवी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ से जंगली हाथियों के झुंड मध्यप्रदेश के जंगलों में प्रवेश करते हैं, जिससे किसानों की फसलें बर्बाद होती हैं और घरों में तोड़फोड़ की घटनाएं बढ़ रही हैं। कुछ मामलों में जंगली हाथियों द्वारा किए गए हमलों में लोगों की मौत भी हो चुकी है। प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर फॉरेस्ट (पीसीसीएफ) वाइल्ड लाइफ के आदेश पर ही इन हाथियों को पकड़ा जा सकता है। जंगली हाथी संरक्षित वन्य प्राणियों की प्रथम सूची में आते हैं और पकड़े जाने के बाद उन्हें टाइगर रिजर्व में भेजकर प्रशिक्षण दिया जाता है। ट्रेनिंग के दौरान हाथियों को यातनाओं का सामना करना पड़ता है, जो कि केंद्रीय पर्यावरण विभाग की गाइड लाइन्स के अनुसार जंगली हाथियों को पकड़ने का कदम अंतिम उपाय के रूप में होना चाहिए। लेकिन मध्यप्रदेश में इसे पहले विकल्प के रूप में अपनाया जा रहा है।
याचिकाकर्ता के वकील का कहना है कि .गोदावरमन थिरुमलापुर बनाम भारत संघ और अन्य मामले में हाल ही में आए एक फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने इंसानों और जंगली जानवरों के बीच टकराव को ठीक से संभालने के लिए कुछ गाइडलाइन तय की हैं और सभी राज्य सरकारों को फसल के नुकसान के लिए मुआवजा नीति बनाने का निर्देश भी दिया है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश अनुसार गाइडलाइन बनाने के निर्देश दिये थे।
याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये दिशा-निर्देश अनुसार गाइडलाइन के निर्धारित के लिए चार सप्ताह का समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। युगलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए उक्त आदेश जारी किये। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पैरवी की।
