
नई दिल्ली। महाराष्ट्र और गुजरात से दो NEET अभ्यर्थियों की मौत की खबर सामने आने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोनों छात्र री-एग्जाम के बाद मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। पुलिस को घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट में डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह जाने और परीक्षा से जुड़े दबाव का उल्लेख होने की बात सामने आई है। दोनों मामलों की पुलिस अलग-अलग जांच कर रही है।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए पारिवारिक सहयोग, नियमित काउंसलिंग और भावनात्मक समर्थन बेहद जरूरी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई छात्र तनाव या अवसाद के लक्षण महसूस कर रहा हो तो उसे समय पर विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराई जाए। पुलिस ने भी स्पष्ट किया है कि दोनों मामलों की जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है।
