नई दिल्ली | भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) द्वारा राष्ट्रीय मुक्केबाजी शिविर के लिए जारी ताजा स्वीकृति पत्र ने देश के शीर्ष एथलीटों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं। इस नई सूची से करीब 40 मुक्केबाजों के नाम गायब हैं, जिसके कारण उनके आगामी राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में शामिल होने पर अनिश्चितता पैदा हो गई है। मुक्केबाजी महासंघ की नीति के अनुसार, ‘चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कप’ में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले इन खिलाड़ियों को शिविर का हिस्सा होना था, लेकिन अंतिम समय पर तकनीकी कारणों या प्रशासनिक चूक की वजह से उनके नाम हटा दिए गए हैं।
भारतीय मुक्केबाजी महासंघ ने इस मामले को बेहद गंभीर बताया है। महासंघ को 29 अप्रैल को प्राप्त हुए पत्र में इन 40 पात्र मुक्केबाजों का जिक्र नहीं था, जिसके बाद से महासंघ लगातार ‘साई’ के अधिकारियों के संपर्क में है। इस विवाद के चलते 5 मई से शुरू होने वाली मूल्यांकन प्रक्रिया को भी एक दिन के लिए स्थगित करना पड़ा है, जो अब 6 मई से शुरू होगी। महासंघ का कहना है कि वे खिलाड़ियों के हितों की रक्षा के लिए प्रयास कर रहे हैं, हालांकि अभी तक खेल प्राधिकरण की ओर से कोई स्पष्ट और संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिल सका है।
इस फैसले से प्रभावित मुक्केबाजों ने अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। खिलाड़ियों का तर्क है कि उन्हें स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया गया था कि सीओएस कप में जीत के बाद उन्हें राष्ट्रीय शिविर में जगह मिलेगी, जो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए चयन का एकमात्र रास्ता है। नाम हटाए जाने से न केवल उनका मनोबल टूटा है, बल्कि साल की सबसे बड़ी खेल प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करने का उनका सपना भी टूटता नजर आ रहा है। मुक्केबाजों ने इस कार्रवाई को अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।

