ग्वालियर:मोतीझील स्थित कोयला वाले हनुमान मंदिर पर आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाय गया। नंद के आनंद भयो…से समूचा पंडाल गूंज उठा। इस मौके पर पूरे पांडाल को गुब्वारों से सजाया गया। भगवान के जन्म का उत्सव मनाते हुए श्रद्धालुओं ने इस मौके पर आनंदित होकर खूब नृत्य किया।
इस अवसर पर भागवताचार्य शरद कुमार शास्त्री ने व्यासपीठ से कहा कि मां के संस्कार अच्छे होते हैं तो तभी बच्चे संस्कारित बनते हैं।
यशोदा मैया जानती थी कि उनका पुत्र साक्षात् नारायण हैं, लेकिन समाज को संदेश देने के लिए उन्होंने कृष्ण को डांटा भी और सीख भी दी। सिर्फ संतान उत्पन्न करके मां की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती, बच्चों को संस्कार देना भी उसका कर्तव्य है। भगवान का नाम लेने से व्यक्ति के मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। अजामिल ने अपने पुत्र का नाम नारायण रखा और नारायण-नारायण पुकार कर ही उसका उद्धार हो गया। इस मौके पर कथा आयोजक एवं मंदिर के पुजारी संतोष भैया, कथा संयोजक प्रेम बरौनिया, यजमान निर्मला मेघसिंह राजावात, शत्रुघन सिंह, लालूसिंह, राजाबेटी, टीकाराम सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भागवत महापुराण की आरती की।
