
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने समन, जमानती वारंट और गिरफ्तारी वारंटों की तामीली में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर दायर याचिका का निराकरण कर दिया। सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने डीजीपी के शपथ-पत्र के माध्यम से प्रदेशभर में न्यायालयीन प्रक्रियाओं की तामीली, निगरानी व्यवस्था और लापरवाही पर की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा पेश किया। इससे संतुष्ट होकर न्यायालय ने रीवा के जेएमएफसी को संबंधित आपराधिक प्रकरण का 30 दिन में निर्णय करने का अनुरोध किया।
हाईकोर्ट ने राजकरण तिवारी बनाम मध्यप्रदेश शासन मामले की सुनवाई करते हुए याचिका का निराकरण कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि ट्रायल पूरा हो चुका है, सभी अभियोजन साक्षियों के बयान दर्ज हो गए हैं और केवल अंतिम बहस शेष है। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से उपमहाधिवक्ता यश सोनी ने पुलिस महानिदेशक का विस्तृत शपथ-पत्र पेश किया। इसमें बताया गया कि न्यायालयीन समन और वारंटों की समयबद्ध तामीली के लिए पुलिस मुख्यालय नियमित परिपत्र जारी करता है व वरिष्ठ अधिकारी इसकी निगरानी करते हैं। शपथ-पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि रीवा जिले में लापरवाही पाए जाने पर 11 पुलिस कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेशभर में लंबित जमानती और गिरफ्तारी वारंटों का वर्षवार विवरण, 22 फरवरी 2022 के परिपत्र के अनुपालन की रिपोर्ट तथा विभिन्न पुलिस जोन से प्राप्त जानकारी भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई।
