भोपाल। सिंहस्थ-2028 की व्यापक तैयारियों के तहत मध्यप्रदेश पुलिस ने राज्यभर में प्रशिक्षण अभियान को तेज करते हुए शुक्रवार को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में राज्य स्तरीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (टीओटी) सेमिनार आयोजित किया। सेमिनार में जिला स्तर पर चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा, मैदानी अनुभवों का आदान-प्रदान तथा पुलिस प्रशिक्षण में नवाचारों पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि सिंहस्थ-2028 पुलिस बल की व्यावसायिक दक्षता, समन्वय क्षमता और जनसेवा की भावना की महत्वपूर्ण परीक्षा होगी। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों से चरणबद्ध तरीके से तैयारियां जारी हैं। उज्जैन में विशेषज्ञों के साथ हुई बैठकों और उच्चस्तरीय समीक्षा के आधार पर विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल, डिजिटल मानव संसाधन प्रबंधन तथा साइबर सुरक्षा से जुड़े विषयों को प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि सिंहस्थ के लिए आवश्यक पुलिस अधोसंरचना संबंधी प्रस्ताव को शासन की स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि पुलिस मुख्यालय का ई-एचआरएमएस प्लेटफॉर्म अंतिम चरण में है। इसके माध्यम से आयोजन के दौरान हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती और प्रबंधन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
कैलाश मकवाना ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ-2025 के सफल आयोजन से भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और अन्य व्यवस्थाओं के सफल मॉडल का अध्ययन कर उन्हें सिंहस्थ की तैयारियों में शामिल किया गया है। टीओटी कार्यक्रम के दो चरणों में अब तक 303 मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा चुके हैं, जो राज्यभर में पुलिसकर्मियों को भूमिका-आधारित प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
उन्होंने वर्ष 2025 और 2026 के दौरान 18 हजार से अधिक पुलिस पदों पर भर्ती की स्वीकृति का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे सिंहस्थ-2028 सहित भविष्य की कानून-व्यवस्था संबंधी आवश्यकताओं के लिए पुलिस बल की क्षमता और मजबूत होगी।
सेमिनार में उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेषज्ञों तथा मध्यप्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने व्यावहारिक एवं परिस्थितिजन्य प्रशिक्षण, एकीकृत संचार प्रणाली, आपदा प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, तकनीक आधारित पुलिसिंग तथा जनसेवा केंद्रित कार्यशैली पर जोर दिया। पैनल चर्चाओं में प्रशिक्षण में नवाचार, नेतृत्व क्षमता, विभिन्न एजेंसियों के समन्वय और परिचालन रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। वहीं, जिला स्तर के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तकनीक-सक्षम सिंहस्थ-2028 के आयोजन के लिए सुझाव भी प्रस्तुत किए।
