नई दिल्ली, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और लाल सागर में तेल टैंकरों पर हुए हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 2 प्रतिशत से अधिक की भारी तेजी दर्ज की गई है। इसके साथ ही बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति ठप होने का बड़ा संकट पैदा हो गया है।
लाल सागर में हमलों से आपूर्ति पर संकट
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने के बाद वैश्विक तेल बाजार में खलबली मच गई है। इस महीने अकेले ब्रेंट क्रूड के दामों में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है, और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो कीमतें 100 डॉलर को पार कर सकती हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था और महंगाई पर असर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों के साथ-साथ परिवहन और रोजमर्रा के सामान महंगे होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे आम जनता पर भारी वित्तीय बोझ पड़ सकता है।

