गंगटोक, 22 जुलाई (वार्ता) दक्षिण सिक्किम के नामची जिले के सामरदुंग में एनएचपीसी की निर्माणाधीन सुरंग धंसने की घटना में बुधवार शाम तीन और शव बरामद किये जाने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 15 हो गयी।
नामची के पुलिस अधीक्षक सोनम डी. भूटिया ने बताया कि बुधवार शाम साढ़े छह बजे तक तीन और शव बरामद किये गये, जिससे मृतकों की संख्या 15 हो गयी। राहत एवं बचाव दल अब भी लापता श्रमिकों की तलाश में जुटे हैं।
यह हादसा सोमवार दोपहर उस समय हुआ था, जब एनएचपीसी की निर्माणाधीन सुरंग का एक हिस्सा ढह गया और कई श्रमिक उसके भीतर फंस गए। सोमवार देर शाम 16 घायल श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। सात शव मंगलवार तड़के बरामद किये गये थे। दिन समाप्त होने तक यह संख्या बढ़कर 12 हो गयी, लेकिन लगातार बारिश और सुरंग के भीतर भारी जलभराव के कारण हालात अत्यधिक जोखिमपूर्ण हो गये, जिसके कारण बचाव अभियान रोकना पड़ा। बचाव अभियान बुधवार दोपहर फिर शुरू किया गया। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), आसनसोल से आए विशेष खनन बचाव विशेषज्ञों तथा अन्य एजेंसियों की टीमों ने सुरंग में दोबारा प्रवेश किया और अभियान के दौरान एक-एक कर तीन और शव बरामद किये।
श्री भूटिया ने बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद विशेष टीमें शेष लापता श्रमिकों की तलाश में जुटी हुई हैं।
इस बीच, एनएचपीसी ने हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक श्रमिक के परिजनों को पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि दक्षिण सिक्किम स्थित तीस्ता चरण-6 जलविद्युत परियोजना की हेड रेस टनल (एचआरटी) में जिला प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड तथा अन्य एजेंसियों के समन्वय से चौबीसों घंटे राहत एवं बचाव अभियान जारी है। कंपनी के शीर्ष अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहकर अभियान की निगरानी कर रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के गृह एवं पर्वतीय मामलों के राज्य मंत्री बिशाल लामा ने घोषणा की कि हादसे में जान गंवाने वाले पश्चिम बंगाल के प्रत्येक श्रमिक के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जायेगी। मृतकों में सात श्रमिक पश्चिम बंगाल के हैं, जिनमें एक अलीपुरद्वार जिले के फालाकाटा तथा छह जलपाईगुड़ी जिले के नागराकाटा और मेटेली क्षेत्र के निवासी हैं। अधिकारियों के अनुसार, सुरंग में फंसे 11 श्रमिक पश्चिम बंगाल के बताये जा रहे हैं।
अधिकारियों ने हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए अलग-अलग जांच शुरू कर दी है। लगभग 1.5 किलोमीटर लंबी इस सुरंग में बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। बचाव दल केवल एक किलोमीटर तक वाहन से पहुंच सका, जबकि शेष 500 मीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ी।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सुरंग के भीतर कार्बन मोनोऑक्साइड सहित अन्य जहरीली गैसें भरी हुई थीं, जिससे बचाव अभियान और कठिन हो गया। अधिकारियों ने कहा कि हादसे के वास्तविक कारणों का अभी पता नहीं चल सका है। श्रमिकों ने हालांकि सुरंग धंसने से पहले तेज विस्फोट जैसी आवाज सुनने की बात कही थी, जिसके बाद सुरंग जहरीली गैसों, संभवतः मीथेन, से भर गयी।
