बेरूत, 22 जुलाई (वार्ता) लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने कहा है कि हिजबुल्ला को निशस्त्र करने के लिए दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी आवश्यक है। दूसरी ओर, हिजबुल्ला ने लेबनान सरकार और इजरायल के बीच हुए समझौते को खारिज करते हुए लेबनान द्वारा इजरायल के साथ प्रत्यक्ष वार्ता के फैसले की आलोचना की है।
हिजबुल्ला का कहना है कि केवल कूटनीतिक प्रयासों से दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना को हटाना संभव नहीं है, क्योंकि इस मामले में लेबनान के पास ईरान जैसी प्रभावी सौदेबाजी की क्षमता नहीं है।अमेरिका की मध्यस्थता में हुए समझौते के तहत इस सप्ताह पहले पायलट क्षेत्र में लेबनानी सेना की तैनाती के साथ क्रियान्वयन शुरू हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालांकि व्हाइट हाउस में श्री आउन के साथ बैठक के दौरान इस प्रक्रिया का केवल संक्षिप्त उल्लेख किया और लेबनान को अमेरिकी समर्थन जारी रखने का आश्वासन दिया, लेकिन किसी ठोस सहायता की घोषणा नहीं की। लेबनानी राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, श्री आउन ने अमेरिकी सांसदों और ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों से कहा कि लेबनानी सशस्त्र बल हिजबुल्ला को निरस्त्र करने में सक्षम हैं, लेकिन इसके लिए दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की पूरी वापसी जरूरी है।
बाद में लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मोआवद द्वारा आयोजित रात्रिभोज में श्री आउन ने कहा,
“ लेबनान तब तक सुरक्षित और एकजुट नहीं हो सकता, जब तक एक राज्य और एक सेना सभी लेबनानी नागरिकों की रक्षा नहीं करती। यदि वास्तव में हिजबुल्ला को निरस्त्र करना है तो पहले कब्जा समाप्त होना चाहिए और सेना को पूरे क्षेत्र पर नियंत्रण संभालना होगा। ”
इजरायल ने हालांकि लेबनानी सेना की क्षमता पर संदेह जताते हुए कहा है कि हिजबुल्ला को सीमा के निकट फिर से सक्रिय होने से रोकने के लिए दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैनिकों की मौजूदगी अभी आवश्यक है।
श्री आउन ने श्री ट्रंप के साथ बैठक में लेबनानी सेना को देश की सुरक्षा और स्थिरता की रीढ़ बताया। जब श्री ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका हिजबुल्ला को निरस्त्र करने के लिए लेबनानी सेना को अतिरिक्त सहायता देगा, तो उन्होंने इस पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर वह श्री आउन से निजी तौर पर चर्चा करेंगे।
मार्च से जारी इजरायल-हिजबुल्ला संघर्ष में लेबनान को भारी नुकसान हुआ है। लेबनानी अधिकारियों के अनुसार, 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं और लगभग 4,300 लोगों की मौत हुई है, इन आंकड़ों में हालांकि नागरिकों और लड़ाकों के बीच अंतर नहीं किया गया है।
उधर, इजरायल ने दावा किया है कि उसने पिछले महीने के अंत तक हिजबुल्ला के कम से कम 2,500 लड़ाकों, जिनमें संगठन की रदवान फोर्स के सैकड़ों सदस्य शामिल हैं, को मार गिराया है। इजरायल के अनुसार, दक्षिणी लेबनान में अभियान के दौरान उसके 38 सैनिक और रक्षा मंत्रालय का एक असैन्य ठेका कर्मचारी भी मारा गया। हिजबुल्ला के रॉकेट हमलों में दो इजरायली नागरिकों की भी मौत हुई, जबकि एक अन्य नागरिक उत्तरी इजरायल में अपनी ही सेना की तोपों की चपेट में आने से मारा गया।
