जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के विरुद्ध दहेज एक्ट के अंतर्गत दर्ज एफआईआर के आधार पर कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसी के साथ अनावेदकों को जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।याचिकाकर्ता पटेरा दमोह निवासी निकलेश अहिरवार की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता का विवाह 2019 में हिंदु रीति-रिवाज से हुआ था। 2021 में पत्नी घर छोडक़र चली गई।
जिसके बाद गुमशुदगी की रिपोर्ट पटेरा थाने में दर्ज कराई थी। कुछ दिन बाद पत्नी घर वापस आ गई। इस बार उसने याचिकाकर्ता के विरुद्ध दहेज एक्ट की रिपोर्ट दर्ज करने पटेरा थाने में आवेदन दिया। आवेदन की सूक्ष्मता से जांच करने पर पाया गया कि पत्नी ने पति और उसके परिवार के विरुद्ध झूठे आरोप लगाए हैं। जिसके बाद आवेदन निरस्त कर दिया गया। इसके बाद 2024 और 2025 में पत्नी ने फिर से पटेरा थाने में वैसा ही आवेदन दिया।
पुलिस ने इस बार भी जांच में आरोप असत्य पाए। अंतत: पत्नी ने एक और प्रयास करते हुए याचिकाकर्ता के विरुद्ध थाना गढ़ाकोटा सागर में दहेज एक्ट अंतर्गत एफआईआर का आवेदन दिया। इस बार आवेदन स्वीकार करते हुए एफआईआर दर्ज कर ली गई। इससे साफ है कि पत्नी दुर्भावनापूर्वक कार्रवाई के पीछे पड़ी है। यह दहेज एक्ट का सरासर दुरुपयोग है।
