
खंडवा। प्रदेश की 123 नगर परिषदों के लिए पार्षदों के मनोनयन की बहुप्रतीक्षित सूची जारी कर दी गई है। लेकिन इस सूची ने खंडवा जिले के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, क्योंकि 123 निकायों की इस विस्तृत फेहरिस्त में खंडवा जिले की एक भी नगर परिषद मुंदी, हरसूद, पंधाना, ओंकारेश्वर का नाम शामिल नहीं है ।
पड़ोसी जिलों में नियुक्तियों की बौछार, खंडवा की फाइल ‘ठंडे बस्ते’ में :
हैरानी की बात यह है कि खंडवा के पड़ोसी जिलों में नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जारी आदेश के अनुसार बुरहानपुर की नगर परिषद् शाहपुर में नियुक्तियां हुई हैं। खरगौन- बड़वानी जिले की कसरावद, बिस्टान, मंडलेश्वर, भीकनगांव, महेश्वर और करही जैसी नगर परिषदों में एल्डरमैन मनोनीत किए जा चुके हैं। देवास जिले की 12 नगर परिषदों में पार्षदों के नाम घोषित कर दिए गए हैं।
इसके बावजूद खंडवा का नाम गायब होना जिले के भाजपा नेतृत्व और संगठन की ‘खींचतान’ की ओर इशारा कर रहा है।
दावेदारों की फौज और गुटबाजी का ‘वीटो’ :
सूत्रों की मानें तो खंडवा की फाइल रुकने का मुख्य कारण सांसद, विधायकों और जिला संगठन के बीच नामों पर आम सहमति न बन पाना है। जिले के प्रत्येक कद्दावर नेता अपने समर्थकों को “एडजस्ट” कराने की जुगत में हैं। जब तक क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को लेकर एक राय नहीं बनती, तब तक सरकार विवादित सूची जारी करने से बच रही है।
कार्यकर्ताओं में मायूसी और बढ़ता राजनीतिक वनवास :
लंबे समय से सत्ता में सक्रिय कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि इस सूची के जरिए उनका ‘राजनीतिक वनवास’ खत्म होगा। लेकिन पहली खेप में नाम न होने से निष्ठावान कार्यकर्ताओं में मायूसी साफ देखी जा सकती है। नाम न छापने की शर्त पर एक कार्यकर्ता ने कहा, “जब पड़ोसी जिलों में नियुक्तियाँ हो रही हैं, तो खंडवा की फाइल क्यों रुकी है? क्या जिले के नेतृत्व में इच्छाशक्ति की कमी है या आपसी मतभेद कार्यकर्ताओं के सम्मान पर भारी पड़ रहे हैं?”
अगली खेप का इंतजार :
फिलहाल मुंदी, हरसूद, पंधाना और ओंकारेश्वर के दावेदार भोपाल की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। अब गेंद जिले के दिग्गजों के पाले में है क्या वे आपसी मतभेद भुलाकर एक जाजम पर आ पाएंगे, या खंडवा के कार्यकर्ताओं को अभी और लंबा इंतजार करना होगा?
