हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने बाल देखभाल संस्थानों को मजबूत करने पर दिया जोर

चंडीगढ़, 22 जुलाई (वार्ता) हरियाणा मानवाधिकार आयोग (एचएचआरसी) ने न्यायमूर्ति ललित बत्रा की अध्यक्षता में सेक्टर-33 स्थित आयोग कार्यालय में महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में राज्य के बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई) के संचालन, अनुदान व्यवस्था, पुनर्वास ढांचे और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में आयोग ने बाल देखभाल संस्थानों को मिलने वाले भरण-पोषण अनुदान में देरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। इस पर महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त एवं सचिव शेखर विद्यार्थी ने बताया कि मिशन वात्सल्य के तहत भारत सरकार के निर्धारित मानकों के अनुसार प्रति बच्चे प्रतिमाह 3,000 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। सरकारी संस्थानों के लिए इसे 1,000 रुपये बढ़ाने का प्रस्ताव भी केंद्र सरकार को भेजा गया है।

महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक डॉ. प्रियंका सोनी ने बताया कि मिशन वात्सल्य के संशोधित वित्तीय मानदंड सितंबर 2026 तक लागू होने की उम्मीद है। उन्होंने आश्वासन दिया कि लंबित मामलों की व्यक्तिगत समीक्षा कर पात्र संस्थानों को जल्द अनुदान उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

बैठक में बताया गया कि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत गठित राज्य एवं जिला स्तरीय निरीक्षण समितियां नियमित रूप से बाल देखभाल संस्थानों का निरीक्षण कर रही हैं। हाल ही में नूंह, रेवाड़ी, अंबाला, करनाल, सोनीपत और पानीपत के संस्थानों का निरीक्षण किया गया है।

विभाग ने जानकारी दी कि राज्य में वर्तमान में 63 बाल देखभाल संस्थान संचालित हैं, जहां निर्धारित मानकों के अनुसार अधीक्षक, परामर्शदाता, केस वर्कर, शिक्षक, चिकित्सा कर्मी और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। साथ ही संस्थानों के बुनियादी ढांचे के विकास और रखरखाव के लिए वित्तीय सहायता भी दी जा रही है।

बैठक के दौरान सदस्य दीप भाटिया ने प्रत्येक बच्चे के लिए आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र और आयुष्मान भारत कार्ड उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन दस्तावेजों के माध्यम से बच्चों को सरकारी योजनाओं का समय पर लाभ मिलेगा और उनके कल्याण से संबंधित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी सहायता मिलेगी।

 

 

 

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