नई दिल्ली, 20 जुलाई (वार्ता) कोयल मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि खानों से निकले कोयले और लिग्नाइट से गैस बनाने की परियोजनाओं को बढ़ावा देने की 37,500 करोड़ रुपये की योजना के लिए आयोजित ओवेदन-पूर्व सम्मेलन में संभावित निवेशकों की भागीदारी उत्साहजनक रही है।
मंत्रालय की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि अतिरिक्त सचिव सनोज कुमार झा की अध्यक्षता में सम्मेलन में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी कंपनियों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं तथा संभावित आवेदकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मंत्रालय ने कहा है कि यह भागीदारी घरेलू कोयले के स्वच्छ एवं मूल्यवर्धित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकार की इस प्रमुख पहल के प्रति उद्योग जगत की मजबूत रुचि को दर्शाती है।
सम्मेलन के दौरान मंत्रालय ने योजना के दिशा-निर्देशों और प्रस्ताव का अनुरोध (आरएफपी) से संबंधित विस्तृत जानकारी और स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए। इसमें पात्रता मानदंड, मूल्यांकन प्रक्रिया, वित्तीय प्रोत्साहन तथा आवेदन प्रक्रिया जैसे महत्वपूर्ण विषयों को विस्तार से समझाया गया। साथ ही प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए सभी प्रश्नों का भी व्यापक रूप से समाधान किया गया। उल्लेखनीय है कि 37,500 करोड़ रुपये की यह योजना 13 मई मंत्रिमंडल ने मंजूरी किया था। इसका उद्देश्य उत्खनित कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं के विकास में तेजी लाना तथा सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (एसएनजी), अमोनिया, मेथनॉल, डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (डीआरआई), सिंथेटिक ईंधन और विभिन्न रसायनों जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देना है।
मंत्रालय का मानना है कि इस योजना में 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश मिल सकता है। साथ ही, प्रतिवर्ष लगभग 7.5 करोड़ टन कोयले का उपयोग सुनिश्चित होगा, करीब 50,000 रोजगार के अवसर सृजित होंगे और ऊर्जा एवं रासायनिक उत्पादों के आयात पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी। मंत्रालय ने सम्मेलन के दौरान यह भी बताया कि आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 7 सितंबर, 2026 निर्धारित की गई है। मंत्रालय ने सभी पात्र संस्थाओं से निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने प्रस्ताव प्रस्तुत करने का आग्रह किया। कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें जो उच्च तापमान और दबाव पर ऑक्सीजन और भाप की नियंत्रित आपूर्ति का उपयोग करके उत्खनित ठोस कोयले या लिग्नाइट को संश्लेषण गैस (सिन्गैस) में परिवर्तित करती है।यह सिन्गैस यूरिया, मेथनॉल और सिंथेटिक प्राकृतिक गैस जैसे उच्च मूल्य वाले रसायनों, उर्वरकों और ईंधनों के उत्पादन के लिए एक बहुमुखी अग्रदूत के रूप में कार्य करती है।

