रूस ने रविवार को यूक्रेन के कीव और अन्य शहरों पर मिसाइलों व ड्रोनों से भीषण हमला किया। 6 लोगों की मौत के साथ इस हमले ने यूक्रेन के एयर डिफेंस सिस्टम की पोल खोल दी है।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने एक बार फिर भीषण रूप ले लिया है। रविवार तड़के रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव सहित कई प्रमुख शहरों पर बैलिस्टिक मिसाइलों, ड्रोनों और गाइडेड बमों से चौतरफा हमला बोला। इस सैन्य कार्रवाई में कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई है और दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
इस हमले ने यूक्रेन की सुरक्षा व्यवस्था, विशेष रूप से अमेरिका निर्मित पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम की सीमाओं को उजागर कर दिया है, जो रूस की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में संघर्ष करता नजर आया।
41 मिसाइलें और 125 ड्रोनों से हमला
यूक्रेनी वायु सेना के मुताबिक, रूस ने रविवार रात करीब 1:30 बजे अपना ऑपरेशन शुरू किया, जो कई घंटों तक चला। मॉस्को ने पूरे यूक्रेन में 41 मिसाइलें और 125 ड्रोन दागे। राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने पुष्टि की कि इनमें से अधिकांश का निशाना राजधानी कीव थी।
कीव के पांच जिलों में हमले के बाद भीषण आग लग गई, जिससे रिहायशी इमारतों, दफ्तरों, औद्योगिक साइटों और एक डॉरमिटरी को भारी नुकसान पहुंचा है।
कई शहरों में तबाही
राजधानी के अलावा, यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खार्कीव के पास एक डाक केंद्र पर हुए हमले में तीन लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा, खेरसॉन और सुमी शहरों को भी रूसी गाइडेड बमों ने निशाना बनाया, जहां जनहानि की खबरें हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, अब रूसी हमले पहले के मुकाबले कहीं अधिक बार हो रहे हैं, जिससे नागरिकों में मानसिक तनाव और डर का माहौल है।
यूक्रेन ने किया पलटवार
रूस के इस हमले के जवाब में यूक्रेन ने भी रूसी ऊर्जा बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया है। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने घोषणा की कि यूक्रेनी यूनिट्स ने स्टावरोपोल इलाके के तीन तेल डिपो और ब्लैक सी में मौजूद रूसी टैंकरों पर हमले किए हैं।
दूसरी ओर, रूस के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उन्होंने रात भर में यूक्रेन के 140 ड्रोनों को मार गिराया है। रूस ने यह भी कहा कि उनके हमले केवल सैन्य उद्देश्यों और ड्रोन निर्माण इकाइयों तक सीमित थे।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कीव की सुरक्षा मजबूत करने के लिए यूक्रेन को पैट्रियट मिसाइल सिस्टम बनाने का लाइसेंस देने की बात कही है, हालांकि इसकी समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह बात साफ हो गई है कि दोनों देशों के बीच संघर्ष अब तेल उद्योग और ऊर्जा संसाधनों को नष्ट करने की ओर मुड़ गया है।
