मुंबई, 17 जुलाई (वार्ता) देश के ऋण-पूंजी (बाँड) बाजार पर रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के एक वार्षिक प्रकाशन में कहा गया है कि विकसित भारत के लिए घरेलू बाँड बाजार में बुनियादी सुधार जरूरी हैं और इस संबंध में नीतियों में सुधार करने होंगे।
मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन की उपस्थित में शुक्रवार को मुंबई में जारी ‘इंडियन डेट मार्केट इयरबुक 2026 – ” बाँडिंग फॉर विकसित भारत 2047″ में एक विश्लेषण में कहा गया है कि 2047 तक देश में गैर-सरकारी ऋण सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 150 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इस इयरबुक के लोकार्पण के अवसर पर क्रिसिल लि. के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिश मेहता, क्रिसिल रेटिंग्स लि के प्रबंध निदेशक सुबोध राय, तथा क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी उपस्थित थे।
क्रिसिल की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के 30 ट्रिलियन ( 30 लाख करोड़) डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को साकार करने के लिए स्थानीय निकायों, कॉरपोरेट्स और व्यक्तियों को उनकी पूर्ण क्षमता तक विकसित होने हेतु भारी वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होगी। इस स्तर का वित्त पोषण आर्थिक उतार-चढ़ावों के के दौरान भी किफायती बना रहना चाहिए।
क्रिसिल ने कहा है कि अमेरिका, ब्रिटेन, यूरो क्षेत्र और जापान की आर्थिक संरचना और आय स्तर उनके यहां तीव्र आर्थिक परिवर्तनों के दौर में जब विकसित भारत के लक्ष्यों के समान थे, तब उनके यहां गैर- संप्रभु (सरकारी) उधारी जीडीपी के 140–150 प्रतिशत के बीच थी। यदि भारत भी इसी प्रकार की वित्तपोषण संरचना अपनाता है देश का गैर-संप्रभु ऋण वर्ष 2047 तक जीडीपी के लगभग 150 प्रतिशत तक तक पहुंच सकता है जो अभी लगभग 84 प्रतिशत है।यह 2000 के दशक के शुरुआत के विकसित अर्थव्यवस्थाओं के स्तर का होगा।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि अब तक भारत के ऋण की अधिकांश आवश्यकताओं को बैंकिंग क्षेत्र ने पूरा किया है। क्रिसिल का कहना है कि हाल के वर्षों में जमा (डिपॉजिट) वृद्धि की गति धीमी हुई है। मार्च 2026 की स्थाति के अनुसार ऋण-जमा अनुपात अभूतपूर्व 82 प्रतिशत के उच्च स्तर पर था। इसे देखते हुए भविष्य में बैंकिंग क्षेत्र की क्षमता सीमित हो सकती है। वित्त वर्ष 2026 के अंत तक भारत का ऋण पूंजी बाजार जीडीपी का लगभग 22 प्रतिशत और सकल बैंक ऋण लगभग 62 प्रतिशत था।
क्रिसिल ने कहा है, “ऐसी स्थिति में कॉर्पोरेट बॉन्ड, प्रतिभूतिकृत साधनों, म्यूनिसिपल बॉन्ड और मनी मार्केट की प्रतिभूतियों से मिले जुले ऋण पूंजी बाजार को देश की विशाल ऋण आवश्यकताओं को पूरा करने में कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।”
क्रिसिल इंटेलिजेंस की वरिष्ठ निदेशक मिरेन लोढ़ा ने नवीनतम इयरबुक के निष्कर्षों पर कहा: “विकसित भारत के वित्तपोषण में सक्षम ऋण पूंजी बाजार के लिए आवश्यक है कि जारीकर्ताओं का आधार व्यापक हो, विभिन्न रेटिंग श्रेणियों में निवेशकों की भागीदारी बढ़े और द्वितीयक बाजार में कारोबार अधिक सक्रिय हो, जिससे मूल्य निर्धारण बेहतर हो सके।
