खंडवा: महाशिवरात्रि पर्व पर प्राचीन खांडव वन की धरा हर-हर महादेव के जयघोष से गुंज उठी। रविवार तडक़े से ही ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से लेकर शहर केचारों दिशाओं में स्थित ऐतिहासिक कुंडों और शिवालयों में आस्था का ज्वार उमड़ पड़ा। हालांकि, भक्ति के इस उत्सव के बीच प्रशासनिक उपेक्षा की एक कड़वी तस्वीर भी सामने आई। शहर के ऐतिहासिक भीमकुंड महादेव मंदिर पहुंचने के लिए हजारों श्रद्धालुओं को धूल के गुबार और जर्जर रास्तों से होकर गुजरना पड़ा, जिसने एक बार फिर सिस्टम की पोल खोल दी।
ऐतिहासिक धरोहर, मगर राह मुश्किल:समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि पंधाना रोड स्थित भीमकुंड का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। मान्यता है कि पांडवों के अज्ञातवास के दौरान महाबली भीम ने यहां तपस्या के लिए शिवलिंग स्थापित किया था। यहाँ बाबा दुर्गानंदजी की देखरेख में वर्षों से सेवा कार्य चल रहा है। महाशिवरात्रि पर यहां विशाल फलाहारी भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की। लेकिन, मुख्य मार्ग से मंदिर तक का करीब डेढ़ किलोमीटर का रास्ता कच्चा और बेहद खस्ताहाल है।
सुनील जैन ने मौके पर मौजूद जनसमूह की ओर से वन मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल और विधायक कंचन तनवे से मांग की है कि जिला पंचायत के माध्यम से इस सडक़ का निर्माण शीघ्र कराया जाए। साथ ही बुरहानपुर रोड से भीमकुंड तक पक्की सडक़ और पैदल पुल का निर्माण हो, ताकि बारिश में भी भक्त आसानी से दर्शन कर सकें।शिवालयों में विशेष श्रृंगार, बंटी भांग प्रसादी:शहर के प्रमुख शिवालयों—पदम कुंड, रामेश्वर कुंड, सूरज कुंड, महादेवगढ़, नीलकंठेश्वर, हाटकेश्वर और सिंधी कॉलोनी स्थित शिवधाम—में सुबह से ही अभिषेक का दौर चला। भक्तों ने दूध, दही, घी, शहद और पंचामृत से भगवान का अभिषेक किया।
शाम होते ही मंदिर आकर्षक विद्युत सज्जा से जगमगा उठे और भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। कई जगहों पर साबूदाने की खिचड़ी और भगवान शिव की प्रिय भांग प्रसादी का वितरण देर रात तक चलता रहा।चारों कुंडों के कायाकल्प की दरकार :इस महापर्व पर एक बड़ी मांग यह भी उठी कि खंडवा की पहचान माने जाने वाले भीमकुंड, सूरजकुंड, पदमकुंड, रामेश्वर कुंड आज भी उपेक्षा का शिकार हैं। श्रद्धालुओं ने जिले के प्रभारी मंत्री और जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि शहर की इन ऐतिहासिक धरोहरों का तत्काल सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार किया जाए, ताकि इन्हें पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सके और आने वाली पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास पर गर्व कर सके।
