
सिंगरौली । किसानों के हित में केंद्र और राज्य सरकार लगातार नई-नई योजनाएं लागू कर रही हैं, लेकिन सिंगरौली जिले में इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर कर्मचारियों की भारी कमी का संकट साफ दिखाई दे रहा है।
कृषि विभाग इन दिनों स्टाफ की गंभीर कमी से जूझ रहा है। विभाग में 118 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 37 कर्मचारी कार्यरत हैं। यानी करीब 70 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं और महज 30 प्रतिशत स्टाफ के भरोसे पूरे जिले की कृषि व्यवस्था संचालित की जा रही है। वर्तमान समय में खरीफ सीजन के चलते किसानों को उन्नत बीज वितरण, खाद उपलब्धता, फसल सलाह, खेतों का निरीक्षण, योजनाओं का प्रचार-प्रसार और शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन का कार्य तेजी से चल रहा है। ऐसे समय में कर्मचारियों की कमी विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। सीमित स्टाफ पर कई गुना अधिक कार्यभार होने से योजनाओं के संचालन और किसानों तक समय पर सेवाएं पहुंचाने में कठिनाइयां सामने आ रही हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार उप संचालक कृषि कल्याण कार्यालय से लेकर क्षेत्रीय अमले तक एडीओ, एसडीओ, आरईओ, लिपिक, भृत्य एवं अन्य श्रेणियों के कुल 118 पद स्वीकृत हैं। इनमें से अधिकांश पद लंबे समय से रिक्त हैं। सबसे अधिक असर मैदानी अमले पर पड़ा है। जिले में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों आरईओ के केवल 28 पद ही भरे हैं, जबकि जरूरत इससे कहीं अधिक है। इसके अलावा लिपिकीय स्टाफ और सहायक कर्मचारियों की कमी भी विभाग की कार्यक्षमता को प्रभावित कर रही है।
मैदानी कर्मचारियों की व्यापक समस्या
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को योजनाओं का लाभ तभी मिलेगा, जब पर्याप्त संख्या में मैदानी कर्मचारी गांव-गांव पहुंचकर जानकारी देंगे, फसलों का निरीक्षण करेंगे और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराएंगे। लेकिन वर्तमान हालात में एक-एक कर्मचारी को कई क्षेत्रों का जिम्मा संभालना पड़ रहा है, जिससे नियमित निगरानी और प्रभावी अमल प्रभावित हो रहा है। जिले के किसान भी अपेक्षा कर रहे हैं कि रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां की जाएं, ताकि बीज वितरण, फसल सुरक्षा, तकनीकी सलाह और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। कर्मचारियों की कमी दूर किए बिना कृषि विभाग पर बढ़ता कार्यभार कम होना मुश्किल नजर आ रहा है, जिसका सीधा असर किसानों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है।
योजनाओंं का क्रियान्वयन भगवान भरोसे
जिले में संचालित कृषि विभाग के जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार एवं क्रियान्वयन भगवान भरोसे है। योजनाओं का प्रचार-प्रसार सिर्फ दफ्तरों के कागजों तक ही सीमित है। चर्चा यहां तक है कि स्टाफ की कमी के वजह से योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार नही हो पा रहा है। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेसियों ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है और कहा है कि भाजपा सरकार कभी भी किसानों की हिमायती नही रही है, सिर्फ किसानों को भ्रमित कर रही है। जब विभाग में स्टाफ ही नही है तो योजनाओं का क्रियान्वयन कैसे होता होगा।
