
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं के पक्ष में अंतरिम राहत प्रदान की है। एसीजे विवेक रूसिया व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने कहा कि अगली सुनवाई तक 350 करोड़ के यूनिफॉर्म के टेंडर की प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा। राज्य सरकार व अन्य प्रतिवादियों को अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
यह याचिका जबलपुर अपैरल इनोवेशन एंड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (जाइमा) द्वारा स्थानीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और वस्त्र उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विमल कांत जैन ने प्रभावी पक्ष रखा। जाइमा के सह-सचिव अजित मोदी के अनुसार, पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा जारी लगभग 350 करोड़ रुपये के यूनिफॉर्म टेंडर की पात्रता शर्तें अत्यधिक प्रतिबंधात्मक हैं, जिससे स्थानीय लघु उद्योग व बुनकर निविदा प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं। स्पिनिंग मिल के लिए 700 करोड़ रुपये व गारमेंट निर्माता के लिए 233 करोड़ रुपये का वार्षिक टर्नओवर अनिवार्य कर दिया गया।350 करोड़ रुपये की नेटवर्थ और करीब 1.95 करोड़ रुपये की ईएमडी की बाध्यता व प्रतिवर्ष 50 लाख यूनिफॉर्म बनाने की क्षमता तथा तीन वर्षों में 105 करोड़ रुपये के समान कार्य का अनुभव अनिवार्य कर दिया गया।
