
जबलपुर। हैदराबाद से जबलपुर लाये गये घोडे की मौतों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान गुरुवार को केयरटेकर की तरफ से बताया गया कि जीवित बचे सभी घोडो को उन्होंने बेच दिया है। याचिकाकर्ता की तरफ से आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा गया कि केयरटेकर को घोड़ों को बेचने का अधिकार नही है। याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी पशु प्रेमी सिमरन इस्सर की तरफ आवेदन पेश करते हुए मांग की गयी कि घोडे की जांच करने वेटनरी डॉक्टरों की टीम के साथ उन्हें फार्म हाउस में जाने की अनुमति प्रदान की जाये। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने आवेदन को स्वीकार करते हुए पनागर थाना प्रभारी तथा जिला पशु अधिकारी के साथ जांच के लिए फार्म हाउस में जाने की अनुमति प्रदान की।
पूर्व में केयरटेकर सचिन तिवारी ने हाईकोर्ट में पेश हफलनामा में बताया था कि हैदराबाद से लाये गये 57 घोड़ों में 19 की मौत हो गयी है। इसके अलावा 22 घोडे बेच दिये गये है और तीन नये घोडे खरीदे गये है। वर्तमान में उसके पास 19 घोड़े है, जिनकी खुराक व स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी घोडे स्वस्थ है और उनकी देखरेख में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा रही है।
याचिका पर गुरूवार को हुई सुनवाई के दौरान केयरटेकर की तरफ से सभी घोडे बैच दिये जाने की जानकारी पेश की गयी। याचिकाकर्ता की तरफ से आपत्ति पेष करते हुए कहा गया कि मालिक नही होने के कारण केयरटेकर घोडो को नही बेच सकता है। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता की तरफ से पेश आवेदन को स्वीकार करते हुए उक्त आदेश जारी किये। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रायन डिसल्वा तथा अधिवक्ता सुरेश अवस्थी उपस्थित हुए।