
सीहोर/ बुधनी। जिले की बुधनी तहसील के ग्राम भैसान के पास मंगलवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया. धान रोपाई के लिए जा रहे मजदूरों से भरी एक पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर पलट गई. हादसे में एक महिला मजदूर की मौत हो गई, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हो गए. घायलों में बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और नाबालिग भी शामिल हैं. सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण, पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तथा राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया. सभी घायलों को तत्काल एंबुलेंस और अन्य वाहनों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया. गंभीर रूप से घायल लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया.
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पिकअप वाहन में 40 से अधिक मजदूर सवार थे. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वाहन में क्षमता से कहीं अधिक लोगों को बैठाया गया था. रास्ते में चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और पिकअप पलट गई. हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई. कई मजदूर वाहन के नीचे दब गए, जिन्हें स्थानीय लोगों ने काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर यातायात व्यवस्था संभाली और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की.
इस हादसे के बाद परिवहन विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से ओवरलोड पिकअप वाहनों का संचालन हो रहा है, जिसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को भी है, लेकिन नियमित जांच और सख्त कार्रवाई के अभाव में वाहन संचालकों के हौसले बुलंद हैं. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाता और ओवरलोड वाहनों पर अंकुश लगाया जाता, तो इस दर्दनाक हादसे से बचा जा सकता था.
पुलिस ने दुर्घटना का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. प्रशासन हादसे के कारणों, वाहन की फिटनेस, चालक की लापरवाही और ओवरलोडिंग के पहलुओं की जांच कर रहा है. इस घटना ने एक बार फिर विभागों द्वारा बरती जा रही लापरवाही को उजागर कर दिया है.
प्रतिबंध के बाद भी मालवाहक वाहन में बैठाते सवारी
धान रोपाई के मौसम में बुधनी, रेहटी, चकल्दी, लाड़कुई और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में खेतिहर मजदूरों को मालवाहक पिकअप वाहनों में भरकर खेतों तक ले जाया जाता है. परिवहन नियमों के अनुसार मालवाहक वाहनों में यात्रियों को बैठाना प्रतिबंधित है, लेकिन इसके बावजूद खुलेआम क्षमता से कई गुना अधिक लोगों को बैठाकर सफर कराया जाता है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति हर साल देखने को मिलती है, लेकिन संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण यह खतरनाक व्यवस्था लगातार जारी है।
