एनईएसएसी अंतरिक्ष तकनीक को आम लोगों के जीवन से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका : डॉ. जितेंद्र

नयी दिल्ली, 14 जुलाई (वार्ता) केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि नॉर्थ ईस्टर्न स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (एनईएसएसी) अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के माध्यम से राष्ट्रीय रणनीतिक प्राथमिकताओं और पूर्वोत्तर क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को नयी दिशा दे रहा है।

डॉ. सिंह ने आज मेघालय के उमियाम स्थित एनईएसएसी के दौरे के दौरान ने केंद्र की उपलब्धियों और विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्हें बताया गया कि एनईएसएसी पूर्वोत्तर के आठों राज्यों में करीब 130 अंतरिक्ष आधारित परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है। इनमें लगभग 50 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 78 परियोजनाएं प्रगति पर हैं। ये परियोजनाएं कृषि, वानिकी, जल संसाधन, भू-विज्ञान, शहरी एवं क्षेत्रीय नियोजन, जियोइन्फॉर्मेटिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, उपग्रह संचार, यूएवी, अंतरिक्ष एवं वायुमंडलीय विज्ञान, आपदा प्रबंधन तथा क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों से जुड़ी हैं।

उन्होंने कहा कि एनईएसएसी अत्याधुनिक अंतरिक्ष तकनीक को आम लोगों के जीवन से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। राज्य सरकारों के साथ इसके बढ़ते सहयोग से अंतरिक्ष तकनीक अब विकास योजनाओं, सुशासन, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और जनसेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने नॉर्थ ईस्ट केन एंड बैम्बू डेवलपमेंट काउंसिल (एनईसीबीडीसी) तथा राज्य सरकारों के साथ मिलकर बांस संसाधनों की वैज्ञानिक मैपिंग को और गति देने का आह्वान किया, ताकि बांस आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिले, संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नये अवसर पैदा हों।

केंद्रीय मंत्री ने बाढ़ की पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक सटीक तथा स्थान-विशिष्ट बनाने पर भी जोर दिया, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों के लोगों को समय रहते उपयोगी जानकारी मिल सके। उन्होंने चेरापूंजी स्थित रामकृष्ण मिशन के जल संरक्षण मॉडल जैसे सफल प्रयासों को अन्य राज्यों में भी अपनाने की आवश्यकता बतायी।

डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर भारत देश के सबसे गतिशील विकास क्षेत्रों में उभरकर सामने आया है, जहां विज्ञान और प्रौद्योगिकी समावेशी विकास के प्रमुख साधन बन रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि एनईएसएसी अपने अंतरिक्ष आधारित कार्यक्रमों और रणनीतिक पहलों के माध्यम से सीमा क्षेत्रों की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग, सुशासन और तकनीक-संचालित विकास को और मजबूत करते हुए आत्मनिर्भर एवं समृद्ध पूर्वोत्तर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

 

 

 

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