
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने महाधिवक्ता कार्यालय में ला आफिसर्स की नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान मामले को सीरियस मैटर बताते हुए राज्य सरकार से चयन प्रक्रिया का पूरा मूल रिकार्ड तलब कर लिया। न्यायालय ने मामले में निर्देशित किया है कि अगली सुनवाई पर महाधिवक्ता स्वयं उपस्थित होकर न्यायालय के समक्ष पक्ष रखें। मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी।
उल्लेखनीय है कि यह मामला हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जबलपुर के संयुक्त सचिव अधिवक्ता योगेश सोनी की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब ला ऑफिसर्स की नियुक्तियों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था, तब चयन का निर्धारित मापदंड क्या था और चयनित अधिवक्ताओं का चयन किन मानकों के आधार पर किया गया। कोर्ट ने इन सभी बिंदुओं से संबंधित संपूर्ण मूल अभिलेख अगली सुनवाई पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन प्रतिवादियों द्वारा अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल नहीं किया जाएगा, उनके संबंध में महाधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत जवाब को ही उनका जवाब माना जाएगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि महाधिवक्ता कार्यालय में विधि अधिकारियों की नियुक्तियां वर्ष 2013 की राजपत्र अधिसूचना और निर्धारित पात्रता मानकों के अनुरूप नहीं की गईं। याचिकाकर्ता का दावा है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा तथा पात्रता संबंधी नियमों की अनदेखी की गई।
