ट्रैक्टर घोटाले का नहीं मिल सका जांच प्रतिवेदन, कार्रवाई पर असर

सीधी। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक सीधी की शाखा गांधीग्राम में 124 ट्रैक्टर ऋण घोटाले की जांच का प्रतिवेदन समय सीमा व्यतीत होने के बाद भी न मिलने से कार्रवाई नहीं हो पा रही है। ट्रैक्टर घोटाले की जांच को लेकर चर्चा होने लगी है कि फिर से मामला दब चुका है।

कुछ मामलों में प्रारंभिक जांच में उस दौरान चालानी कार्रवाई की गई थी। अब मामले की जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। चर्चा है कि एक जन प्रतिनिधि ने लाखों में सौदा कर मामले को रफा-दफा कराने की दम भरा है। गौरतलब है कि कलेक्टर विकास मिश्रा के आदेश पर फिर जांच शुरू तो हुई लेकिन निर्धारित तिथि 8 मई 2026 के बीतने के महीने भर बाद भी जांच प्रतिवेदन नहीं मिल सका है। दरअसल ट्रैक्टर ऋण घोटाले की जांच को पूर्ण करना जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। ट्रैक्टर ऋण घोटाला के सामने आने के बाद से गठित टीमों के पूर्व में 4 एडीएम बदल चुके हैं लेकिन निर्धारित तिथि तक जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं हुआ। कारण घोटाले से जुड़े कई दस्तावेजों को ही बैंक स्तर से गायब करा दिया गया है। लिहाजा गठित टीम को जांच पूरी करने के लिए संबंधित कागजात ही नहीं मिल पा रहे हैं। ट्रैक्टर ऋण घोटाले का मामला कलेक्टर विकास मिश्रा के संज्ञान में आने पर उनके द्वारा जांच के लिए अपर कलेक्टर बी.पी. पाण्डेय को जांच टीम का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वहीं जांच टीम के सदस्य में एसडीएम गोपद बनास राकेश शुक्ला, डीएसपी मुख्यालय अमन मिश्रा, गोपद बनास तहसीलदार राकेश शुक्ला, वरिष्ट सहकारी निरीक्षक मदन सिंह उइके एवं वरिष्ट सहकारी निरीक्षक एस.पी. पाण्डेवा को शामिल किया गया।

बताते चलें कि दो करोड़ से ऊपर का ट्रैक्टर घोटाला 3 वर्ष पूर्व सामने आने पर तत्कालीन कलेक्टर द्वारा 6 सदस्यीय टीम जांच के लिए गठित की गई थी। उस दौरान सात दिवस में जांच प्रतिवेदन देने के आदेश दिए गए थे। अपर कलेक्टर के नेतृत्व में गठित जांच टीम ने उस दौरान भी सदस्य एसडीएम गोपद, डीएसपी, तहसीलदार, सहकारी निरीक्षक सहकारिता विभाग, वरिष्ट सहकारी निरीक्षक सहकारिता विभाग को शामिल किया गया था। टीम द्वारा अपनी जांच शुरू भी की गई लेकिन उसका जांच प्रतिवेदन सामने नहीं आया है। कारण टीम द्वारा जांच का दायरा ज्यादा बताते हुए इस पर अपनी जांच कागजों में ही जारी रखी गई जिसके चलते जांच प्रतिवेदन सामने नहीं आया। बाद में उच्च स्तरीय दबावों के चलते इस घोटाले की फाइल को ठंडे बस्ते में कैद करा दिया गया।

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इन बिन्दुओं पर होनी है जांच

ट्रैक्टर ऋण घोटाले की जांच करने के लिए गठित टीम को कई मुख्य बिंदुओं पर अपनी जांच को फोकस करना है। जांच टीम वर्तमान में बैंक रिकार्ड, ऋण स्वीकृत प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी के साथ जांच कर रही है। कई मुख्य दस्तावेज अब भी टीम को नहीं मिले हैं। सूत्रों के अनुसार बैंक के तत्कालीन अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ ही प्रकरण तैयार करने वाले तथाकथित लीगल एडवाइजरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। बताते चलें कि तत्कालीन सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला द्वारा केन्द्रीय सहकारी बैंक शाखा गांधीग्राम में हुए ट्रैक्टर ऋण घोटाले को उजागर किया गया था।

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इनका कहना है

ट्रैक्टर घोटाला सालों पुराना है, इस वजह से जांच में आवश्यक कई जरूरी कागजात अभी तक नहीं मिल सके हैं। उनके द्वारा स्वयं स्थल का निरीक्षण किया गया। जिससे सभी आवश्यक कागजात उपलब्ध हो सकें। जांच चल रही है, जांच के लिए सभी आवश्यक कागजात उपलब्ध हो जाए तो टीम द्वारा प्रतिवेदन तैयार कर लिया जाए।

बी.पी.पाण्डेय, एडीएम सीधी

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