वाशिंगटन, 12 जुलाई (वार्ता) होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों ने रविवार को एक-दूसरे पर नये सिरे से हमले किये। अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले करने का दावा किया, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की। यह ताजा सैन्य टकराव पिछले महीने घोषित युद्धविराम के टूटने के बाद अब तक की सबसे तीव्र कार्रवाई माना जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया था कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर फिर से हमले शुरू कर दिये हैं। अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने कहा कि शनिवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के करीब 140 सैन्य ठिकानों पर हमले किये। इस सप्ताह यह तीसरा बड़ा सैन्य अभियान है और तीन रातों में 300 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है। सेंटकॉम के अनुसार, हमलों में मिसाइल एवं ड्रोन ठिकानों, नौसैनिक क्षमताओं, गोला-बारूद भंडार, संचार नेटवर्क तथा तटीय निगरानी केंद्रों को निशाना बनाया गया।
सेंटकॉम ने कहा कि यह कार्रवाई साइप्रस के ध्वज वाले कंटेनर पोत एम/वी जीएफएस गैलेक्सी पर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) द्वारा किये गये हमले के बाद की गयी। अमेरिकी सेना के अनुसार जहाज के इंजन कक्ष को भारी नुकसान पहुंचा और चालक दल का एक सदस्य लापता है।
सेंटकॉम ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन जारी है।
उधर, यूनाइटेड किंगडम मेरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ने बताया कि आग लगने के बाद चालक दल ने जहाज छोड़ दिया और लाइफबोट के जरिए निकलने के बाद स्थानीय अधिकारियों ने उन्हें सुरक्षित बचा लिया। ईरान ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा कि संबंधित जहाज जलडमरूमध्य में अनधिकृत मार्ग का इस्तेमाल कर रहा था। आईआरजीसी ने कहा कि उसने चेतावनी स्वरूप गोली चलाई, जहाज को रोका और अगले आदेश तक होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया। आईआरजीसी ने कहा, “जब तक इस क्षेत्र में अमेरिकी हस्तक्षेप समाप्त नहीं होता, जलडमरूमध्य बंद रहेगा।”
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी हमलों की आवाज दक्षिणी तटीय प्रांतों बुशहर, बंदर अब्बास और क़ेश्म द्वीप सहित कई इलाकों में सुनायी दी।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने बुशहर प्रांत के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिकी सेना ने असालूयेह, दैर, बुशहर, दश्ती और तंगेस्तान सहित पांच शहरों को निशाना बनाया। अधिकारियों ने दावा किया कि इस सप्ताह के हमलों में बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निकट स्थित नागरिक बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। ईरानी मीडिया ने लोरिस्तान प्रांत के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि पश्चिमी ईरान के वेसियान शहर के बाहरी इलाके में भी अमेरिकी सेना ने दो हवाई हमले किये। इन हमलों के कुछ ही घंटे बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों के प्रतिष्ठानों पर मिसाइल एवं ड्रोन हमले किये। ईरानी मीडिया के अनुसार, आईआरजीसी ने कतर स्थित अल-उदीद एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसके अलावा कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ढांचे तथा ओमान के दुक्म बंदरगाह पर अमेरिकी नौसैनिक अभियानों से जुड़े लॉजिस्टिक प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया गया।
कतर ने कहा कि उसने आने वाली मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया, हालांकि इंटरसेप्शन के दौरान गिरे मलबे से एक बच्चे सहित तीन लोग घायल हो गये।
कतर के गृह मंत्रालय ने कहा, “इंटरसेप्शन अभियान के दौरान गिरे मलबे से एक बच्चे सहित तीन लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों का उपचार किया जा रहा है।”
संयुक्त अरब अमीरात ने भी मिसाइल और ड्रोन खतरे से निपटने के लिए कार्रवाई करने की पुष्टि की। बहरीन ने चेतावनी सायरन बजाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश दिया, जबकि कुवैत ने भी हवाई खतरों को निष्क्रिय करने का दावा किया। ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस पर हमला कर वहां के कमांड सेंटर और ड्रोन हैंगर नष्ट कर दिये। तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी से मुलाकात कर होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा की। ओमान ने इस समुद्री मार्ग के प्रबंधन के लिए एक प्रारंभिक प्रस्ताव भी तैयार किया है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जब तक वाणिज्यिक जहाज सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य से गुजरने में सक्षम नहीं होंगे, तब तक ईरान के साथ वार्ता आगे नहीं बढ़ सकती। अमेरिका के साथ वार्ता में शामिल ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “एकतरफा समझौतों का दौर खत्म हो चुका है। हमने कहा था कि या तो अपना वादा निभाइए या इसकी कीमत चुकाइए। अब हकीकत आपके दरवाजे पर दस्तक दे रही है।”
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सेंटकॉम की कार्रवाई का समर्थन करते हुए एक्स पर लिखा, “ईरान ने गलत फैसला किया। अब उसे इसकी कीमत चुकानी होगी।” सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर दबाव बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन साथ ही व्यापक क्षेत्रीय युद्ध से भी बचने की कोशिश कर रहे हैं।

