सीहोर/ रेहटी। वन विभाग और पुलिस की चैकिंग से बचने के लिए सागौन के तस्करों ने हैरतअंगेज तरीका तलाश निकाला. सागौन तस्करों ने एक बुलेरो पर आरटीओ की तख्ती लगाई और सागौन के अवैध परिवहन में लग गए. हालांकि इसके बाद भी वन विभाग के अमले ने उनकी कारस्तानी को भांप लिया और बुलेरो सहित एक कार को पकड़ते हुए उसमें भरी अवैध सागौन की सिल्ली सहित चार आरोपियों को दबोचने में सफलता हासिल की है.
जिले के जंगलों में सागौन तस्करों के हौसले इस कदर बुलंद हो गए कि पुलिस और वन विभाग की आंखों में धूल झोंकने के लिए उन्होंने अपनी बुलेरो पर आरटीओ की प्लेट तक लगा दी. लेकिन वन विभाग की सतर्कता और सटीक रणनीति के आगे उनकी चालाकी ज्यादा देर नहीं टिक सकी. जिले के वन परिक्षेत्र देलावाड़ी में वन अमले ने गुरुवार की देर रात घेराबंदी कर अवैध सागौन परिवहन में लगी एक कार और एक बोलेरो को पकड़ लिया. कार्रवाई के दौरान दोनों वाहनों में सवार चार आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया.
मामले में वन परिक्षेत्राधिकारी प्रशांत कुमार खरे ने बताया कि वन विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि जंगल क्षेत्र से कीमती सागौन की लकड़ी अवैध रूप से काटकर वाहनों के माध्यम से बाहर भेजी जा रही है. मुखबिर की सूचना मिलते ही वन अधिकारियों ने टीम गठित कर संभावित मार्गों पर घेराबंदी कर दी.
कुछ ही देर बाद ग्राम आमाडोह के नजदीक संदिग्ध कार और बोलेरो मौके पर पहुंचीं. बताया जाता है कि पहले तो वन अमले ने आरटीओ की तख्ती लगी बोलेरो को जाने दिया, लेकिन जब उसके पीछे आ रही होंडा सिटी कार को रोककर तलाशी ली गई तो उसमें अगली सीट हटाकर अवैध रूप से रखी सागौन की सिल्लियां नजर आईं. कार में सवार लोगों से पूछताछ की तो उन्होंने आगे निकली बोलेरो से भी सागौन की अवैध तस्करी के बारे में बताया. वन अमले ने तुरंत बोलेरो का पीछा किया और उसे भी पकड़ लिया. उसमें से भी सागौन की अवैध लकड़ी मिली, जिसके बाद दोनों वाहन जब्त कर लिए गए. रेंजर खरे ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ जारी है.
आरोपियों का कहना पूर्व में आरटीओ में थी अटैच
बुलेरो और होंडा सिटी कार के साथ पकड़ाए आरोपी ग्राम मालाखेड़ी निवासी सोहेल शेख आ. नासिर शेख, नीलेश यादव आ. छोटेलाल यादव, अर्पित यादव आ. शारदा प्रसाद यादव के अलावा सुरई ढाबा निवासी सुरेश आ. कान्हा बारेला ने पूछताछ में बताया कि उक्त बुलेरो क्रमांक एमपी 05 टी 2181 पूर्व में नर्मदापुराम के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में अटैच थी. अटैचमेंट समाप्त होने के बाद भी उन्होंने वाहन पर लगी तख्ती को नहीं हटवाया था. पुलिस व वन विभाग की चैकिंग से बचने के लिए वह इसका उपयोग सागौन की तस्करी में कर रहे थे.
