
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बुधवार को राज्य सरकार पर गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदे गए गेहूं के कथित रूप से गायब होने, मंदिरों में चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताओं तथा नर्मदा जल विवाद समझौते को लेकर कई सवाल उठाए।
भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में उमंग सिंघार ने दावा किया कि वर्ष 2025-26 के समर्थन मूल्य खरीदी अभियान के दौरान खरीदे गए 7,168 टन गेहूं का सरकारी रिकॉर्ड में उल्लेख है, लेकिन 13 जिलों में भौतिक सत्यापन के दौरान यह स्टॉक नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 18.82 करोड़ रुपये मूल्य का गेहूं गायब होने के बावजूद अब तक व्यापक जांच नहीं कराई गई, जिससे भ्रष्टाचार के प्रति सरकार की उदासीनता उजागर होती है। उन्होंने मांग की कि सरकार बताए कि यह गेहूं कहां गया और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई।
नेता प्रतिपक्ष ने आगर मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में चढ़ावे और आभूषणों के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं और पूर्व में अन्य मंदिरों में भी ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
नर्मदा जल विवाद समझौते का उल्लेख करते हुए उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने प्रदेश के हितों से समझौता किया है। उनका कहना था कि जहां पहले राज्य हजारों करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा कर रहा था, वहीं अब 550 करोड़ रुपये का भुगतान करने पर सहमति जताई गई है। उन्होंने मांग की कि सरकार इस समझौते की पूरी शर्तें सार्वजनिक करे ताकि प्रदेश की जनता वास्तविक स्थिति से अवगत हो सके।
