
जबलपुर। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने अपने अहम आदेश में कहा है कि किसी व्यक्ति के जीवन में बालिग होने की अपनी अहमियत होती है। उसे अपनी पसंद चुनने का अधिकार होता है। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को निराकरण कर दिया।
गोकलपुर रांझी निवासी मॉ की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि उसकी बेटी को रितिक चौधरी नामक युवक ले गया है। बेटी के लापता होने की रिपोर्ट उनकी तरफ से रांझी थाने में दर्ज करवाई गयी थी। बेटी की तलाश करने के पुलिस द्वारा कार्यवाही नहीं किये जाने के कारण उक्त बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गयी है। हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए युवती को पेष करने के लिए पुलिस को दिये थे।
याचिका की सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा पेश की गयी युवती से युगलपीठ ने अकेले में चर्चा की। युवती ने युगलपीठ को बताया कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से अनावेदक रितिक के साथ गयी थी और उसी के साथ रहना चाहती है। वह अपने माता-पिता के साथ नहीं रहना चाहती है और अनावेदक व किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा उस पर कोई दबाव तथा अनुचित प्रभाव नहीं डाला गया है।
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि कोई व्यक्ति बालिग हो जाता है, तो उसे अपनी मर्जी की जगह पर और अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का अधिकार होता है। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका तभी लागू होती है जब यह साबित हो जाए कि संबंधित व्यक्ति को गैर-कानूनी या अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ याचिका का निराकरण कर दिया।
