नयी दिल्ली, 10 जुलाई (वार्ता) विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने भारत के राष्ट्रीय रूफटॉप सोलर कार्यक्रम को गति देने के लिए वित्तपोषण को मंजूरी दे दी है। वित्त बैंक ने शुक्रवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि इस पहल का उद्देश्य लाखों घरों तक स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाना है। साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े विनिर्माण, स्थापना और सेवा क्षेत्र में लगभग 17 लाख रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
इस कार्यक्रम के लिए वित्तपोषण पैकेज में अंतरराष्ट्रीय पुनर्निमाण एवं विकास बैंक (आईबीआरडी) से 82 करोड़ डॉलर का ऋण, क्लीन टेक्नोलॉजी फंड से छह करोड़ डॉलर का रियायती ऋण और आईबीआरडी के लिवेबल प्लैनेट फंड से एक करोड़ डॉलर का अनुदान शामिल है।
इसके अतिरिक्त, विश्व बैंक 4.2 अरब डॉलर का निजी निवेश भी जुटायेगा, जो वाणिज्यिक ऋणों के रूप में उपलब्ध कराया जायेगा ताकि लोग अपने घरों की छतों पर सौर पैनल लगा सकें। कार्यक्रम के टास्क टीम लीडर मोएज शरीफ ने कहा, “यह कार्यक्रम वित्तीय बाधाओं को दूर कर और बिजली वितरण कंपनियों, बैंकों तथा विक्रेताओं की क्षमता बढ़ाकर आवासीय रूफटॉप सोलर बाजार में बड़ा बदलाव लायेगा। बिना किसी जमानत के उपलब्ध कराये जाने वाले वित्तपोषण के माध्यम से लोग अपने घरों की छतों पर सौर पैनल स्थापित कर सकेंगे और अपने मासिक बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी ला सकेंगे।”
भारत ने साल 2070 तक शुद्ध रूप से शून्य कार्बन उत्सर्जन हासिल करने और 2035 तक अपनी कुल बिजली उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा का हिस्सा 60 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि देश में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा का तेज विस्तार हुआ है, लेकिन घरों की छतों पर सौर पैनल लगाने की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है। इस क्षमता का पूरा लाभ उठाने के लिए सरकार ने ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य देशभर के एक करोड़ ग्रामीण और शहरी परिवारों को घरों की छतों पर सौर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहित करना, घरेलू बिजली खर्च कम करना और रूफटॉप सोलर उपकरणों के स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
भारत में विश्व बैंक के कार्यवाहक निदेशक पॉल प्रॉक्सी ने कहा, “विश्व बैंक पिछले एक दशक से भारत के रूफटॉप सोलर क्षेत्र को सहयोग दे रहा है। इस दौरान हमने दो अरब डॉलर से अधिक की वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी है जिससे इस क्षेत्र की स्थापित क्षमता 500 मेगावाट से बढ़कर 27 गीगावाट से अधिक हो गयी है। यह नया वित्तपोषण देश में आवासीय रूफटॉप सोलर के विस्तार में मदद करेगा और आपूर्ति श्रृंखला तथा स्थापना तंत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगा।”

