
जबलपुर। हाईकोर्ट ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण से निकली राख के विनष्टीकरण आबादी वाले क्षेत्र से सिर्फ पांच सौ मीटर दूर किये जाने पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट के उक्त आदेश को वापस लेने के लिए सरकार की तरफ से आवेदन पेश किया गया है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक कुमार सिंह तथा जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की युगलपीठ ने आवेदन पर दो सप्ताह बाद सुनवाई निर्धारित की है।
गौरतलब है कि साल 2004 में आलोक प्रताप सिंह ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण की मांग करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में कर रही थी। पूर्व में हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने 8 अक्टूबर 2025 को जारी अपने आदेश में कहा था कि जहरीले कचरे की राख की लैंडफिलिंग के लिए आदेश के बावजूद भी सरकार के द्वारा दूसरे स्थान के संबंध में जानकारी नहीं दी गयी। सरकार के द्वारा इंसानों की आबादी से सिर्फ 500 मीटर दूर लैंड फिलिंग का स्थान निर्धारित किया गया है। कचरा अभी भी ज़हरीला है और अगर इसे ठीक से नहीं रोका गया तो भूकंप जैसी किसी प्राकृतिक आपदा के कारण उसे रोकने वाला स्ट्रक्चर ही टूट जाए या गिर जाए, तो एक और आपदा होगी। राज्य सरकार को ज़हरीली राख को ऐसी जगहों पर ले जाने की संभावना पर विचार करना चाहिये जो इंसानी बस्तियों, पेड़-पौधों और पानी के सोर्स से बहुत दूर हों। कंटेनमेंट सिस्टम टूट भी जाए, तो भी इसके बुरे असर बहुत कम हों। युगलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देशित किया था कि जहरीले कचरे की राख की लैंडफिलिंग की सबसे अच्छी टेक्निकल एक्सपर्टीज़ पाने के लिए कोई ग्लोबल टेंडर निकाला जाए, जिनके पास इस तरह का काम करने और ज़हरीले केमिकल कचरे को कंटेन करने के अनुभव हो, इस संबंध में जानकारी प्रस्तुत करें। इसके अलावा लैंडफिलिंग के लिए दूसरे स्थान का चयन करें। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से उक्त आवेदन पेश किया गया।
