ट्रंप का अगला टारगेट मोजतबा खामेनेई, अमेरिका ने 170 ठिकानों पर की भीषण बमबारी

अमेरिका और ईरान के बीच भयानक युद्ध शुरू हो गया है। ईरानी हमले के बाद अमेरिकी सेना ने 170 ठिकानों पर भीषण बमबारी की है। डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर अब मोजतबा खामेनेई आ गए हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच महायुद्ध का बिगुल पूरी तरह से बज चुका है। होर्मुज पर ईरानी हमले के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के 170 ठिकानों पर भीषण बमबारी की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए शांति समझौते को पूरी तरह रद्द कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अब इस गंभीर विवाद का समाधान बातचीत से नहीं बल्कि युद्ध के मैदान में होगा।

महज 24 घंटे के अंदर अमेरिका ने ईरान के कई अहम शहरों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए हैं। ट्रंप की हिट लिस्ट में ईरान के अहम सैन्य ठिकाने और प्रमुख एटमी सेंटर शामिल हैं। पिछले 48 घंटों में पांच प्रांतों पर हुए इन भयानक अमेरिकी हमलों में कम से कम 14 लोग मारे गए हैं। वहीं 78 से ज्यादा लोग बुरी तरह जख्मी हुए हैं और आगे भी भारी तबाही की बहुत ज्यादा आशंका है।

अमेरिका के निशाने पर अहम शहर
अमेरिका ने ईरान के बंदर अब्बास और बुशहर जैसे बड़े व्यावसायिक शहरों पर बमबारी की है। बुशहर में ईरान का एकमात्र चालू परमाणु बिजली प्लांट मौजूद है, जिसे मुख्य निशाना बनाया गया है। इसके अलावा होर्मुज से सटे सिरिक, चाबहार पोर्ट और केश्म द्वीप पर भी भीषण हमले हुए हैं। अमेरिका इन हमलों से ईरान की नौसेना और तेल-गैस सुविधाओं को बहुत भारी चोट पहुंचाना चाहता है।

नाटो का अमेरिका को पूरा समर्थन
होर्मुज पर किए गए ताजा हमलों के बाद नाटो ने भी अमेरिका का खुलकर समर्थन किया है। नाटो महासचिव मार्क रूटे ने कहा है कि युद्धविराम का उल्लंघन होने पर अमेरिका का जवाब देना बहुत जरूरी है। इससे यह आशंका बढ़ गई है कि ईरान के खिलाफ नाटो भी सीधे इस जंग में उतर सकता है। वहीं ईरान ने भी पलटवार करते हुए इस महायुद्ध के लिए नाटो को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है।

मोजतबा खामेनेई पर अमेरिका की नजर
अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की सैन्य ताकत की कमांड मोजतबा खामेनेई के हाथों में है। इसलिए अब अमेरिका और इजरायल का मुख्य टारगेट सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ही हैं। अमेरिका ने मोजतबा और सैन्य अधिकारियों की जानकारी देने पर 1 करोड़ डॉलर का इनाम रखा है। भारतीय रुपयों में यह भारी रकम लगभग 92 करोड़ रुपये है, जो ईरान को कमजोर करने की चाल है।

जनाजे में नहीं दिखे नए सुप्रीम लीडर
सैंतीस साल तक ईरान के सुप्रीम लीडर रहे अली खामेनेई के जनाजे में 2 करोड़ लोगों के जुटने का दावा है। लेकिन इजरायली हमले के खौफ और सुरक्षा कारणों से मोजतबा खामेनेई वहां बिल्कुल नजर नहीं आए। ईरान अभी भी होर्मुज को बंद रखने और 3 तेल टैंकरों पर हमले करने की जिद पर अड़ा हुआ है। इन हालातों से यह साफ हो गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह जंग अभी और लंबी चलेगी।

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