
छिंदवाड़ा। जिला अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन अस्पताल परिसर की बुनियादी व्यवस्थाएं अब भी बदहाल हैं। सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों को हो रही है जिन्हें खून की जांच के लिए अस्पताल के मुख्य द्वार से लैब तक ले जाना पड़ता है। गंभीर, बुजुर्ग और फ्रैक्चर से पीड़ित मरीजों को स्टेचर या व्हीलचेयर के सहारे इस रास्ते से गुजरना पड़ता है, लेकिन जगह-जगह बने गड्ढे, उबड़-खाबड़ सड़क और खुली नालियां उनकी पीड़ा को और बढ़ा देती हैं।
स्टेचर या व्हीलचेयर के गड्ढों से गुजरते ही मरीजों को तेज झटके लगते हैं। दर्द से कराहते मरीजों को देखकर परिजनों की चिंता भी बढ़ जाती है। अस्पताल आने वाले लोगों का कहना है कि वर्षों से यह रास्ता इसी तरह खराब पड़ा है, लेकिन इसे सुधारने की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। रोजाना दर्जनों मरीज इसी मार्ग से होकर पैथोलॉजी लैब तक पहुंचते हैं और उन्हें अनावश्यक तकलीफ झेलनी पड़ती है।
अस्पताल कर्मचारियों के अनुसार कई बार इस समस्या की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी है। इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि अस्पताल प्रबंधन और मेडिकल प्रबंधन इस मामले में एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आते हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि सड़क और परिसर से जुड़े कार्य मेडिकल प्रबंधन के दायरे में आते हैं, जबकि मेडिकल प्रबंधन इसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन पर बताता है। विभागों के इस आपसी टालमटोल का सीधा खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों और मरीजों ने प्रशासन से मांग की है कि मुख्य द्वार से लैब तक के मार्ग का शीघ्र मरम्मत कार्य कराया जाए, गड्ढों को भरा जाए और नालियों की उचित व्यवस्था की जाए, ताकि गंभीर मरीजों को जांच के लिए ले जाते समय उन्हें अनावश्यक दर्द और परेशानी का सामना न करना पड़े।
फैक्ट फाइल
मुख्य द्वार से लैब तक का रास्ता वर्षों से जर्जर।
गड्ढों के कारण स्टेचर और व्हीलचेयर पर मरीजों को लगते हैं झटके।
फ्रैक्चर और गंभीर मरीजों की बढ़ जाती है पीड़ा।
रोजाना दर्जनों मरीज इसी समस्या से होते हैं परेशान।
अस्पताल और मेडिकल प्रबंधन जिम्मेदारी तय करने के बजाय एक-दूसरे पर डाल रहे दोष।
