गांधी के राम बनाम भाजपा के राम: कांग्रेस का बौद्धिक विमर्श, जब तक गांधी के विचार जीवित, गोडसे की विचारधारा नहीं पनपेगी

भोपाल। प्रदेश कांग्रेस के राजीव गांधी सभागार में कांग्रेस विचार विभाग द्वारा आयोजित बौद्धिक विमर्श में वक्ताओं ने महात्मा गांधी के आदर्शों और उनकी समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार रखे। कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक मुद्दों पर तीखी टिप्पणियाँ भी सामने आईं।

प्रख्यात पत्रकार पंकज चतुर्वेदी ने “गांधी के राम” की व्याख्या करते हुए कहा कि गांधी का राम समावेशिता और सामाजिक न्याय का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि गांधी की अवधारणा में राम दलितों, वंचितों और आदिवासी समुदायों को अपनी शक्ति में पिरोने वाले थे, जो समाज में पीछे छूट गए लोगों को उठाने वाले पतित पावन थे। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी राम को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है और इस प्रक्रिया में राम की स्थापित मर्यादाओं को कमजोर किया जा रहा है।

चतुर्वेदी ने गांधी की सादगी की तुलना वर्तमान शासन शैली से करते हुए कहा कि गांधी ने वर्धा में मात्र 100 रुपये में सेवा कुटी बनाकर देश की सेवा की और स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वहीं, उन्होंने दावा किया कि आज 20 हजार करोड़ रुपये से भव्य निर्माण कराए जा रहे हैं, जबकि 81 करोड़ लोग 5 किलो अनाज पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि निर्भरता कभी स्वतंत्रता का पर्याय नहीं हो सकती।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि जब तक गांधी के विचार जीवित हैं, तब तक नाथूराम गोडसे की विचारधारा पनप नहीं सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी की हत्या के बाद भी प्रतीकात्मक रूप से उन्हें बार-बार समाप्त करने की कोशिश की गई, किंतु गांधी के विचार आज भी जीवित हैं और अनंत काल तक जीवित रहेंगे।

प्रदेश कांग्रेस विचार विभाग के अध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने भारत की प्राचीन सभ्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता वाले देश की पितृभूमि किसी अपेक्षाकृत नए राष्ट्र को बताने का प्रयास उचित नहीं है। उन्होंने इस संबंध में भाजपा से स्पष्टिकरण की मांग की।

पूर्व मंत्री पी. सी. शर्मा ने गांधी के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि भाजपा विदेश नीति के बहाने नए वैचारिक आधार खोजने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस प्रशिक्षण विभाग के महेंद्र जोशी ने भी भाजपा की विचारधारा पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की।

“गांधी के राम” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में विचार विभाग, इंटक और नर्मदा सेवा सेना के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूर्व श्रम आयुक्त राम गोपाल पांडे ने नए श्रम कानूनों पर अपने विचार व्यक्त किए।

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