इस्लामाबाद | पाकिस्तान के प्रमुख इस्लामी विद्वान और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी माने जाने वाले मुफ़्ती सईद खान ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अपनी ही सेना और खुफिया एजेंसी ISI की पोल खोल दी है। मौलवी ने स्वीकार किया है कि कश्मीर में सक्रिय आतंकी समूहों के पीछे सीधे तौर पर ISI का हाथ है। मुफ़्ती सईद के इस चौंकाने वाले खुलासे ने पाकिस्तान की ‘प्रॉक्सी वॉर’ रणनीति और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसके आधिकारिक रुख को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस बयान के बाद पाकिस्तान के सियासी और सैन्य गलियारों में हड़कंप मच गया है, हालांकि सरकार ने अभी तक इस पर चुप्पी साध रखी है।
मौलवी ने अत्यंत विचलित करने वाला दावा करते हुए कहा कि पाकिस्तान के नियंत्रण वाले शरणार्थी कैंपों में बेसहारा महिलाओं और लड़कियों का भयानक शोषण किया जा रहा है। उनके अनुसार, बुनियादी भोजन और एक वक्त की रोटी के बदले कश्मीरी मुस्लिम महिलाओं को अपने जिस्म का सौदा करने पर मजबूर किया जाता है। मुफ़्ती सईद ने आरोप लगाया कि खुद को ‘मुजाहिदीन’ कहने वाले लड़ाके आर्थिक रूप से कमजोर और अस्थिर परिस्थितियों में फंसी महिलाओं को निशाना बनाते हैं। ये आरोप अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की उन रिपोर्ट्स की पुष्टि करते हैं जो संघर्ष क्षेत्रों में यौन हिंसा की बात करती रही हैं।
मुफ़्ती सईद खान सुन्नी इस्लाम की देवबंदी विचारधारा के बड़े विद्वान और इस्लामाबाद स्थित अल-नदवाह एजुकेशनल ट्रस्ट के संस्थापक हैं। उनका इतिहास काफी विवादास्पद रहा है; उन्होंने 1995 में पाकिस्तान में तख्तापलट की कोशिश में भी हिस्सा लिया था। वे इमरान खान की पार्टी PTI की कोर कमेटी के सदस्य रहे हैं और उन्होंने ही इमरान खान और बुशरा बीबी का निकाह संपन्न कराया था। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने रसूखदार व्यक्ति द्वारा सेना और खुफिया एजेंसी पर लगाए गए ये आरोप वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की छवि को भारी नुकसान पहुँचा सकते हैं और कश्मीर मुद्दे पर उसके दावों की हवा निकाल सकते हैं।

