अंकारा, 08 जुलाई (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की मांग को हवा देकर वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है।
नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान श्री ट्रम्प ने इस रणनीतिक आर्कटिक द्वीप को अमेरिकी सुरक्षा के लिए बेहद अहम बताते हुए दावा किया कि डेनमार्क के लिए इसका कोई खास महत्व नहीं है और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इसे वापस लौटाना अमेरिका की ‘नासमझी’ थी।
श्री ट्रम्प के इस आक्रामक रुख पर कड़ा एतराज जताते हुए डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने साफ शब्दों में दो टूक जवाब दिया है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और संप्रभुता के मुद्दे पर किसी भी तरह की सौदेबाजी का सवाल ही पैदा नहीं होता। बुधवार को नाटो महासचिव मार्क रुटे की मौजूदगी में श्री ट्रम्प ने कहा कि डेनमार्क के स्वायत्त नियंत्रण वाला यह क्षेत्र अमेरिका के लिए ‘बेहद अहम’ है, लेकिन ‘डेनमार्क के लिए इसका कोई मतलब नहीं’ है।
अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान श्री ट्रम्प ने दावा किया कि ग्रीनलैंड अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका को यह क्षेत्र डेनमार्क को वापस लौटाना ही नहीं चाहिए था। श्री ट्रम्प ने कहा, “हमने ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लिया था और फिर नासमझी में इसे वापस लौटा दिया। हमें इसे उन्हें वापस नहीं देना चाहिए था, क्योंकि असली जरूरत तो हमें है। हमें केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए इसकी जरूरत है।”
श्री ट्रम्प ने इस बात पर जोर दिया कि आर्कटिक क्षेत्र में अपने सुरक्षा हितों की रक्षा करने और वहां रूस तथा चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कब्जा होना बेहद जरूरी है। उन्होंने इस द्वीप की सुरक्षा करने की डेनमार्क की क्षमता पर भी सवाल उठाये और चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर सहयोगी देश अमेरिका के इस रुख का समर्थन नहीं करते हैं, तो वह यूरोप में अपनी सैन्य प्रतिबद्धताओं पर फिर से विचार कर सकता है।
श्री ट्रम्प के इस बयान पर डेनमार्क और ग्रीनलैंड की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आयी है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने दोहराया कि ग्रीनलैंड की स्थिति को लेकर किसी भी तरह की बातचीत या सौदेबाजी का सवाल ही पैदा नहीं होता। सुश्री फ्रेडरिक्सन ने अपनी संप्रभु भूमि सहित नाटो के “एक-एक इंच” क्षेत्र की रक्षा करने का संकल्प जताया और साफ शब्दों में संदेश दिया कि यह द्वीप बिक्री के लिए नहीं है।
तुर्की में आयोजित उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) शिखर सम्मेलन से इतर पत्रकारों से बातचीत में सुश्री फ्रेडरिक्सन ने कहा कि इस मुद्दे पर अमेरिका का रुख अब पूरी तरह खुलकर सामने आ चुका है। उन्होंने कहा, “मैंने कल अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान सुना है और दुर्भाग्य से इस मामले पर अमेरिका का रुख पूरी तरह साफ हो चुका है।”
सुश्री फ्रेडरिक्सन ने कहा, “हमारा रुख पहले की तरह आज भी बिल्कुल स्पष्ट है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है। हम उम्मीद करते हैं कि हमारे सभी सहयोगी देश ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का सम्मान करेंगे। हम एक संप्रभु राष्ट्र हैं और सभी को हमारी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की कद्र करनी चाहिए।” यह घटनाक्रम ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर डेनमार्क और अमेरिका के बीच चल रहे गहरे मतभेदों को उजागर करता है।
ग्रीनलैंड के स्थानीय नेताओं ने भी श्री ट्रम्प के बयान को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के भविष्य का फैसला केवल यहां की जनता ही करेगी। उल्लेखनीय है कि ग्रीनलैंड, डेनमार्क साम्राज्य के अंतर्गत स्वायत्त क्षेत्र है।
यह पहली बार नहीं है। श्री ट्रम्प अपने पहले कार्यकाल से ही ग्रीनलैंड के सामरिक स्थान और वहां मौजूद प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों का हवाला देकर इसे हासिल करने की इच्छा जताते रहे हैं। डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने हालांकि हर बार इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और अपनी क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की मांग की है।
श्री ट्रम्प ने यूरोप से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की भी चेतावनी दी है और तर्क दिया है कि पिछले दो दशकों में यूरोप काफी बदल चुका है।श्री ट्रम्प ने कहा, “हम यूरोप से अपने सभी सैनिकों को हटा सकते हैं, क्योंकि आपने भी गौर किया होगा कि आज का यूरोप 20 वर्ष पहले जैसा नहीं रहा।” उन्होंने आगाह किया कि यूरोप इस समय घुसपैठ और ऊर्जा नीति के गंभीर संकट से जूझ रहा है।
श्री ट्रम्प ने कहा, “उन्हें संभलकर रहना होगा। अगर उन्होंने अप्रवासन और ऊर्जा के मामले में सतर्कता नहीं बरती, तो आने वाले समय में यूरोप का अस्तित्व ही खत्म हो जायेगा।”
उधर, ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री मुते एगेडे ने स्पष्ट कहा है कि ग्रीनलैंड का भविष्य केवल वहां की जनता तय करेगी। श्री एगेडे ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हमेशा से ऐसा ही होता आया है और आगे भी ऐसा ही रहेगा।”तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयब अर्दोगान के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में श्री ट्रम्प ने यह भी स्वीकार किया कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे की उनकी इसी ज़िद के कारण नाटो के साथ उनके रिश्तों में खटास आयी थी।
इससे पहले जून में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के समक्ष कहा था कि ट्रम्प प्रशासन ग्रीनलैंड और डेनमार्क के साथ बातचीत कर रहा है और यह वार्ता “सकारात्मक दिशा में” आगे बढ़ रही है।
