नागपुर हवाई अड्डे पर बनेगा दूसरा रनवे और नया टर्मिनल भवन, 10 गुना होगी यात्री क्षमता

नयी दिल्ली/ नागपुर, 08 जुलाई (वार्ता) नागपुर के बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का अगले आठ साल में पूरी तरह कायाकल्प कर इसकी यात्री क्षमता बढ़ायी जायेगी तथा दूसरे रनवे और एक नये एकीकृत टर्मिनल भवन का निर्माण होगा। हवाई अड्डे की परिचालक कंपनी जीएमआर एयरपोर्ट्स लिमिटेड ने बुधवार को एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए अगले आठ साल के लिए एक महत्वाकांक्षी तीन चरण वाले विकास रोडमैप की घोषणा की।

साथ ही उसने बताया कि विस्तार योजना के तहत 30 साल में इसकी यात्री क्षमता मौजूदा 30 लाख सालाना से बढ़ाकर तीन करोड़ की जायेगी। उपलब्ध भूमि पर भविष्य में इसे बढ़ाकर पांच करोड़ तक करने की भी संभावना है। साथ ही इस हवाई अड्डे को एक प्रमुख कार्गो एवं लॉजिस्टिक्स हब के रूप में भी विकसित करने की योजना है जिसकी दीर्घकालिक कार्गो हैंडलिंग क्षमता 1.5 लाख टन प्रतिवर्ष होगी। यह घोषणा नागपुर हवाई अड्डे के निजीकरण की प्रक्रिया के तहत 30 साल के लिए जीएमआर को इसका संचालन सौंपा गया है। जीएमआर की इकाई जीएमआर नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (जीएनआईएएल) ने 25 जून 2026 को लगभग 1,000 हेक्टेयर भूमि का हस्तांतरण पूरा कर हवाई अड्डे का परिचालन शुरू कर दिया था।

विकास योजना के पहले चरण के तहत यात्री अनुभव को बेहतर बनाने, परिचालन क्षमता बढ़ाने तथा नागपुर को विदर्भ और आसपास के क्षेत्रों के लिए एक प्रमुख विमानन एवं लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में विकसित किया जायेगा। इसके लिए जीएमआर एयरपोर्ट्स लगभग 300 करोड़ रुपये का प्रारंभिक निवेश करेगा। पहले चरण का काम एक से डेढ़ साल के भीतर पूरा होने की उम्मीद है। इसमें मौजूदा टर्मिनल तथा एयरसाइड/ लैंडसाइड सुविधाओं का नवीनीकरण किया जायेगा, अतिरिक्त चेक-इन काउंटर एवं सेल्फ चेक-इन कियोस्क बनाये जायेंगे, अतिरिक्त एक्स-रे मशीनों के साथ सुरक्षा जांच क्षेत्र का पुनर्गठन किया जायेगा और केवल हैंड बैगेज वाले यात्रियों के लिए एक्सप्रेस सुरक्षा लेन बनाये जायेंगे।

इसके अलावा, यात्रियों की सुगम आवाजाही के लिए फोरकोर्ट कर्ब का विस्तार किया जायेगा, अतिरिक्त एवं आधुनिक शौचालय बनाये जायेंगे, घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए समर्पित कार्ड लाउंज बनेंगे और बस बोर्डिंग गेटों की संख्या बढ़ाकर चार की जायेगी। दूसरे चरण के विकास कार्य अगले तीन से चार साल में पूरे होंगे। इसमें एक नया एकीकृत टर्मिनल भवन बनाया जायेगा जिसकी यात्री क्षमता 40 लाख वार्षिक होगी। अतिरिक्त विमान पार्किंग स्टैंड बनाये जायेंगे। एक नया एकीकृत कार्गो टर्मिनल भी बनेगा जिसकी क्षमता 20,000 टन सालाना होगी। इन-फ्लाइट किचन, भूमिगत ईंधन आपूर्ति प्रणाली सहित फ्यूल फार्म तथा ग्राउंड हैंडलिंग अवसंरचना का भी निर्माण किया जायेगा। बेहतर पार्किंग तथा पहुंच मार्गों का विकास किया जायेगा और वाणिज्यिक तथा सिटी-साइड विकास परियोजनाओं को पूरा किया जायेगा।

तीसरे चरण के तहत पांच से आठ साल में दूसरे रनवे, नये एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) टावर एवं तकनीकी भवन, समर्पित विद्युत एवं जल आपूर्ति अवसंरचना और दीर्घकालिक विकास एवं परिचालन क्षमता को समर्थन देने वाली अतिरिक्त सुविधाओं के निर्माण की योजना है। जीएमआर की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि जीएनआईएएल को हस्तांतरित 1,000 हेक्टेयर भूमि में से लगभग 100 हेक्टेयर क्षेत्र को सिटी-साइड डेवलपमेंट अथवा एयरोसिटी के लिए आरक्षित किया गया है। इससे वाणिज्यिक गतिविधियों, रोजगार सृजन तथा क्षेत्रीय आर्थिक विकास के नये अवसर उत्पन्न होने की उम्मीद है।
जीएमआर एयरपोर्ट्स के अध्यक्ष जी.बी.एस. राजू ने कहा कि नागपुर हवाई अड्डे का यह परिवर्तन विश्वस्तरीय विमानन पारितंत्र विकसित करने की कंपनी की दीर्घकालिक सोच को दर्शाता है। देश के अवसंरचना-आधारित विकास के साथ जीएमआर भविष्य के लिए तैयार ऐसे हवाई अड्डों के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जो राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ यात्रियों और समुदायों को उत्कृष्ट अनुभव प्रदान करें।

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