जीपीए के जरिए संपत्ति हस्तांतरण पर दिल्ली सरकार सख्त

नयी दिल्ली, 08 जुलाई (वार्ता) दिल्ली सरकार ने अचल संपत्तियों के पंजीकरण में स्टांप ड्यूटी की फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने के लिए जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) के जरिए होने वाले संपत्ति लेन-देन की जांच को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर अब सभी सब-रजिस्ट्रार जीपीए दस्तावेजों की गहन जांच करेंगे और रक्त संबंधियों के अलावा अन्य व्यक्तियों के पक्ष में होने वाले जीपीए मामलों को अनिवार्य रूप से ‘कलेक्टर ऑफ स्टांप’ के पास भेजा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बुधवार को कहा कि सरकार राजस्व की सुरक्षा और नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में केवल ‘जीपीए’ के नाम पर नाममात्र की स्टांप ड्यूटी देकर ऐसे दस्तावेज पंजीकृत करा लिए जाते हैं, जिनमें वास्तव में संपत्ति की बिक्री, कब्जा हस्तांतरण और मालिकाना हक देने जैसे प्रावधान शामिल होते हैं। इसे स्टांप ड्यूटी की चोरी बताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों को अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार में नए निर्देशों के अनुसार, सब-रजिस्ट्रार प्रत्येक जीपीए दस्तावेज की बारीकी से जांच करेंगे। यह देखा जाएगा कि दस्तावेज में धनराशि के लेन-देन का उल्लेख है या नहीं, संपत्ति का कब्जा सौंपने की बात शामिल है या नहीं, जीपीए अपरिवर्तनीय तो नहीं है तथा उसमें संपत्ति बेचने, उपहार देने, स्थानांतरित करने या बंधक रखने जैसे स्थायी अधिकार तो नहीं दिए गए हैं।

यदि ऐसे प्रावधान पाए जाते हैं तो मामले को आगे की जांच के लिए भेजा जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्र, पुत्री, भाई और बहन जैसे रक्त संबंधियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में निष्पादित जीपीए का पंजीकरण सीधे नहीं होगा। ऐसे सभी मामलों को उचित स्टांप शुल्क निर्धारण के लिए संबंधित कलेक्टर ऑफ स्टांप के पास भेजना अनिवार्य होगा। कलेक्टर ऑफ स्टांप को 30 दिनों के भीतर कारण सहित लिखित आदेश जारी करना होगा कि संबंधित दस्तावेज सामान्य जीपीए है या उस पर बिक्री विलेख (कन्वेयंस डीड) के समान स्टांप शुल्क देय होगा। विशेष परिस्थितियों में यह अवधि अधिकतम तीन महीने तक बढ़ाई जा सकेगी। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि कोई सब-रजिस्ट्रार इन निर्देशों का उल्लंघन करते हुए बिना कलेक्टर ऑफ स्टांप को भेजे ऐसे जीपीए का पंजीकरण करता है तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रत्येक सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में ऐसे मामलों का अलग रजिस्टर रखा जाएगा और मासिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

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