
भोपाल। देश विरोधी गतिविधियों मे संलिप्त पीएफआई के नौ सदस्यों की जमानत मंगलवार को निरस्त की गई. जिला अदालत ने आरोपी अनवर खान, ख्याजा हुसैन, मोह शमशाद, इमरान हुसैन, आबिद खान, इशांक खान, मोह युसैफ मौलानी, मोहसिन कुरैशी, नासिर नंदवी की जमानत निरस्त की है.
संभागीय जनसम्पर्क अधिकारी मनोज त्रिपाठी ने बताया कि न्यायालय डॉ मुकेश मलिक विशेष न्यायाधीश (एनआईए) के द्वारा थाना एटीएस/एटीएफ विरूद्ध अब्दुल करीम बैकरीवाला व अन्य के मामलें मे आरोपीगण अनवर खान, ख्याजा हुसैन, मोह शमशाद, इमरान हुसैन, आबिद खान, इशांक खान, मोह युसैफ मौलानी, मोहसिन कुरैशी, नासिर नंदवी की जमानत निरस्त की दी गई. प्रकरण में विशेष लोक अभियोजक विक्रम सिंह एवं मनोज त्रिपाठी ने पैरवी की.
साल 2022 के प्रकरण में अब्दुल करीम बैकरीवाला एवं अन्य 21 आरोपीगण द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों मे पीएफआई संगठन के पदाधिकरी होते हुये भारत सरकार के विरूद्ध आंतकवादी गतिविधियों का आपराधिक षडंयत्र करते हुये. भारत के विभिन्न शहरों मे टेनिंग कैम्प कराये गये थे, जिसमें सदस्यों को दुश्मनों को मारने के लिये शरीर की विभिन्न नाजुक अंगों पर हमला करने की ट्रेनिंग दी गई थी. साथ ही उनके पास से विभिन्न प्रकार की आंतकी गतिविधियों से संबंधित दस्तावेज जप्त किये गये थे. उनके द्वारा भारत की वतर्मान संघीय सरकार को उखाड फैंककर इस्लामिक शासन वर्ष 2047 तक स्थापित करने का उद्देश्य शामिल था.
आरोपीगण की ओर से विभिन्न जमानत आवेदन प्रस्तुत कर इस आधार पर जमानत की मांग की गई थी. आरोपीगण के विरूद्ध यूएपीए की धारा 13 एवं धारा 18 के अपराध आर्कषित नही होते तथा आरोपीगण काफी समय से जेल निरूद्ध है. विवेचना के दौरान विधिक प्रकियों का पालन नही किया गया. एटीएस के विशेष लोक अभियोजक विक्रम सिंह एवं मनोज त्रिपाठी ने मामले में जमानत आवेदनों का लिखित में जवाब प्रस्तुत किया. जवाब में यह व्यक्त किया गया कि आरोपीगणों का कृत्य गंभीर प्रकृति का है. उनके द्वारा सरकार को उखाड फैंकने जैसा गंभीर अपराध का आपराधिक षडयंत्र किया गया है. उनके पास से विभिन्न प्रकार आंतकी गतिविधियों से संबंधित दस्तावेज प्राप्त हुये, जिसमें विजन 2047 इस्लामिक शासन स्थापित करने जैसा दस्तावेज भी शामिल थे. साथ ही आरोपीगण द्वारा विभिन्न कैम्पों के माध्यम से युवाओं को जोडकर उन्हे देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त कर उन्हें देश की वर्तमान व्यवस्था एवं शासन के विरूद्ध उकसाते थे. न्यायालय द्वारा अभियोजन के तर्को एवं मामलें की परिस्थितियों को देखते हुये आरोपीगण की जमानत निरस्त की गई है.
