नयी दिल्ली, 07 जुलाई (वार्ता) शिक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2025-26 के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक 2.0 (पीजीआई-एस) तथा जिलों के प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक (पीजीआई-डी) की रिपोर्ट जारी कर दी है।
शिक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि इन रिपोर्टों का उद्देश्य देशभर में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता, पहुंच, अवसंरचना, शासन व्यवस्था और सीखने के परिणामों का वैज्ञानिक आकलन करना है।
मंत्रालय के अनुसार भारत की शिक्षा प्रणाली दुनिया की सबसे बड़ी शिक्षा प्रणालियों में शामिल है। देश में 14.67 लाख से अधिक स्कूल, 1.03 करोड़ शिक्षक और लगभग 24.72 करोड़ विद्यार्थी हैं। ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता का नियमित मूल्यांकन नीति निर्माण और सुधार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा विकसित पीजीआई-एस 2.0 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शन का मूल्यांकन 70 संकेतकों और कुल 1000 अंकों के आधार पर करता है। इसमें प्रदर्शन को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है, जिससे राज्यों के बीच तुलनात्मक और संतुलित मूल्यांकन संभव हो सके। इस सूचकांक में छह प्रमुख डोमेन शामिल हैं – अधिगम परिणाम एवं गुणवत्ता, पहुंच, अवसंरचना एवं सुविधाएं, समानता, शासन प्रक्रियाएं तथा शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण।
शिक्षा मंत्रालय ने जिला स्तर पर मूल्यांकन को और प्रभावी बनाने के लिए पीजीआई-डी तैयार किया है। इसमें 70 संकेतकों के आधार पर कुल 600 अंकों का मूल्यांकन किया जाता है। यह ढांचा शिक्षा नीतियों के जमीनी स्तर पर प्रभाव और जिलों के प्रदर्शन का आकलन करने पर केंद्रित है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार इन दोनों सूचकांकों का उद्देश्य राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और जिलों को अपनी शैक्षिक व्यवस्था की ताकत और कमियों की पहचान करने में मदद करना तथा गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा के लिए सुधारात्मक कदमों को बढ़ावा देना है।
