मनोरा मंदिर ट्रस्ट पर सवाल, पुजारी परिवार के पुत्र और पौत्रों को 14 वर्षों से न्याय का इंतजार

ग्यारसपुर/विदिशा। सेवा, समर्पण और लोककल्याण का संदेश देने वाले धार्मिक स्थलों से समाज न्याय और संवेदनशीलता की अपेक्षा करता है। लेकिन ग्यारसपुर स्थित श्री जगदीश स्वामी मंदिर ट्रस्ट, मनोरा से जुड़ा एक प्रकरण इन अपेक्षाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। मंदिर की पीढ़ियों से सेवा करने वाला एक पुजारी परिवार पिछले 14 वर्षों से अपने कथित वैध अधिकार की भूमि के लिए भटकने को विवश होने का दावा कर रहा है।

पीड़ित परिवार के अनुसार, मंदिर के जीर्णोद्धार से पूर्व स्वर्गीय जानकीदास बैरागी के पुत्र खुमानदास, नारायणदास, पूरनदास, माधौदास एवं गोपालदास बैरागी अपने परिवारों सहित मंदिर परिसर के तीनों ओर निवास करते थे। मंदिर निर्माण के दौरान उनके आवास प्रभावित हुए। परिवार का कहना है कि विशेष रूप से स्वर्गीय नारायणदास बैरागी के पुत्र एवं पौत्रों को आज तक उनके हिस्से की वैकल्पिक भूमि का विधिवत कब्जा नहीं मिल सका।

परिवार ने जिला कलेक्टर को दिए आवेदन में उल्लेख किया है कि मंदिर निर्माण के समय प्रभावित आवास के बदले मंदिर परिसर के समीप वैकल्पिक भूमि देने का आश्वासन दिया गया था। उनका आरोप है कि 14 वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो भूमि का राजस्व सीमांकन कराया गया और न ही वैधानिक रूप से कब्जा दिलाया गया।

आवेदन के अनुसार, इस संबंध में मंदिर ट्रस्ट, तहसील कार्यालय एवं एसडीएम कार्यालय में वर्षों से लगातार आवेदन दिए जाते रहे, लेकिन अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। परिवार का यह भी कहना है कि भूमि अधिग्रहण एवं वैकल्पिक भूमि आवंटन से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां मांगने के बावजूद उपलब्ध नहीं कराई गईं।

परिवार के अनुसार, 5 जुलाई 2026 को ग्यारसपुर तहसीलदार एवं बासौदा विधायक हरिसिंह रघुवंशी के हस्तक्षेप से मंदिर परिसर में बैठक आयोजित की गई थी। उनका दावा है कि बैठक में ट्रस्ट के अधिकांश पदाधिकारी अनुपस्थित रहे तथा कुछ पदाधिकारियों को बैठक की सूचना भी नहीं दी गई, जिससे समाधान की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

अब परिवार ने जिला कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, भूमि अधिग्रहण एवं वैकल्पिक भूमि आवंटन से संबंधित समस्त अभिलेख उपलब्ध कराने, भूमि का सीमांकन कराकर विधिवत कब्जा दिलाने तथा आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है।

जिन प्रश्नों के उत्तर आज भी बाकी हैं

– यदि मंदिर निर्माण के लिए पुजारी परिवार का आवास लिया गया था, तो 14 वर्षों बाद भी वैकल्पिक भूमि का सीमांकन और कब्जा क्यों नहीं दिया गया?

– भूमि अधिग्रहण एवं वैकल्पिक भूमि आवंटन से जुड़े मूल अभिलेख कहाँ हैं और क्या वे सुरक्षित हैं?

– वर्षों से मांग किए जाने के बावजूद संबंधित दस्तावेज उपलब्ध क्यों नहीं कराए गए?

– यदि प्रशासन के संज्ञान में यह मामला लंबे समय से था, तो समयबद्ध समाधान क्यों नहीं हुआ?

– 5 जुलाई 2026 की बैठक में अधिकांश पदाधिकारी अनुपस्थित क्यों रहे? यदि कुछ को सूचना नहीं दी गई, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?

– यदि ट्रस्ट की समस्त कार्यवाही नियमानुसार हुई है, तो संबंधित अभिलेख सार्वजनिक करने में क्या आपत्ति है?

प्रशासन की निष्पक्षता पर टिकी उम्मीद

यह मामला केवल एक परिवार की भूमि का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया में लोगों के विश्वास का भी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन इस लंबे समय से लंबित प्रकरण में कितनी शीघ्रता और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है।

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