
सीहोर/ भैरुंदा। मूंग फसल की शत-प्रतिशत सरकारी खरीदी की मांग को लेकर सोमवार को भैरुंदा नगर प्रदेश के सबसे बड़े किसान आंदोलनों में से एक का गवाह बना. डेरा डालो-घेरा डालो आंदोलन के तहत हजारों किसान कृषि उपज मंडी में जुटे और बाद में 1500 से अधिक ट्रैक्टरों (के साथ विशाल रैली निकालते हुए नगर के प्रमुख मार्गों से इंदौर-भोपाल मुख्य मार्ग तक पहुंचे. इसके बाद दुर्गा चौक पर करीब पांच घंटे तक चक्काजाम किया गया, जिससे 3 से 5 किलोमीटर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा.
सुबह से ही भैरुंदा तहसील के लगभग हर गांव सहित हरदा और आसपास के जिलों से किसान ट्रैक्टरों के साथ मंडी पहुंचे. ट्रैक्टरों पर लगे झंडे, डीजे और गूंजते नारों से शहर आंदोलनमय हो गया. किसान पंचायत में सरकार की खरीदी नीति को किसान विरोधी बताते हुए निर्णायक संघर्ष का ऐलान किया गया. इसके बाद निकली करीब दो किलोमीटर लंबी ट्रैक्टर रैली एक घंटे से अधिक समय तक शहर की सड़कों पर चलती रही.
चक्काजाम के दौरान किसानों का अनोखा विरोध भी देखने को मिला. उन्होंने सड़क पर ही कंडे जलाकर बाटी बनाई, अचार के साथ भोजन किया, चाय बनाई और सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ कर सरकार को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की. घेरा डालो-डेरा डालो और किसान भीख नहीं, अपना अधिकार मांग रहा है जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा. किसानों का आरोप था कि सरकार ने मूंग खरीदी को सीमित कर हजारों किसानों की मेहनत पर संकट खड़ा कर दिया है. उनका कहना था कि खेत में जितनी उपज हुई है, उसका बड़ा हिस्सा समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा जाएगा, जिससे किसानों को मजबूरी में व्यापारियों को औने-पौने दाम पर फसल बेचनी पड़ेगी. किसानों ने स्पष्ट कहा कि उन्हें किसी प्रकार की खैरात नहीं, बल्कि उनकी मेहनत का उचित मूल्य चाहिए.
किसानों ने डीएपी, यूरिया सहित उर्वरकों की कमी और बढ़ती कीमतों पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि खाद वितरण की वर्तमान व्यवस्था किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है. कई बार ओटीपी, तकनीकी दिक्कतों और दूसरे केंद्रों पर आवंटन के कारण किसानों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है. इसलिए ग्राम पंचायत स्तर पर पर्याप्त खाद उपलब्ध कराई जाए.
किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन को भोपाल विधानसभा घेराव तक ले जाया जाएगा और आवश्यकता पडऩे पर इसे राष्ट्रीय स्तर तक विस्तारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश के किसान संगठन एकजुट हैं और अपने अधिकारों के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे।
किसानों के आंदोलन को देखते हुए प्रशासन सुबह से अलर्ट रहा. करीब 90 पुलिसकर्मी तैनात किए गए तथा यातायात को वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया गया, बावजूद इसके कई घंटों तक जाम की स्थिति बनी रही. प्रशासन ने किसानों से लगातार बातचीत की, लेकिन समाचार लिखे जाने तक किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे. आंदोलन के चलते स्कूली वाहनों से घर लौट रहे बच्चे भी परेशान होते रहे. ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी भी स्कूल नहीं आ सके.
किसान स्वराज संगठन की प्रमुख मांगें
किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि उनकी प्रमुख मांग 100 प्रतिशत मूंग खरीदी, प्रति एकड़ खरीदी की सीमा समाप्त कर पूरी उपज की खरीदी और सभी पंजीकृत किसानों से एमएसपी पर खरीदी सुनिश्चित करना है. साथ ही खरीदी के बाद समय पर भुगतान, फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी, किसान कल्याण निधि की लंबित राशि जारी करने तथा ई-टोकन व्यवस्था समाप्त कर पुरानी खाद वितरण प्रणाली लागू करने की भी मांग की गई.
