नयी दिल्ली, 06 जुलाई (वार्ता) मौजूदा कैलेंडर वर्ष की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान देश में विलय एवं अधिग्रहण और निजी इक्विटी सौदों का कुल मूल्य दोगुने से अधिक होकर 36.3 अरब डॉलर हो गया।
यह साल की पहली तिमाही की तुलना में 127 प्रतिशत अधिक है। हालांकि सौदों की संख्या में गिरावट देखी गयी जो दिखाता है कि बड़े मूल्य के सौदे ज्यादा हुए हैं।
ग्रांट थॉर्नटन इंडिया की हालिया डीलट्रैकर रिपोर्ट के अनुसार, इस तिमाही में कुल 565 सौदे हुए जो पिछली तिमाही की तुलना में 18 प्रतिशत कम हैं। हालांकि, भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में किये गये बड़े रणनीतिक अधिग्रहणों के कारण कुल सौदों का मूल्य पिछले चार वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
इस वृद्धि में विलय एवं अधिग्रहण सबसे बड़ा कारक रहा। कुल 240 विलय-अधिग्रहण सौदों का मूल्य 27.9 अरब डॉलर रहा। हालांकि इन सौदों की संख्या 12 प्रतिशत कम हुई, लेकिन उनका कुल मूल्य 302 प्रतिशत बढ़ गया। इसकी मुख्य वजह एक-एक अरब डॉलर से अधिक मूल्य वाले पांच सीमा-पार अधिग्रहण शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यदि इन पांच अरब डॉलर से अधिक के सौदों को अलग भी कर दिया जाए, तब भी विलय-अधिग्रहण सौदों का कुल मूल्य पिछली तिमाही की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक रहा, जिससे बड़े और मध्यम आकार के सौदों में लगातार मजबूती का संकेत मिलता है।
निजी इक्विटी गतिविधियों में कुछ नरमी रही। इस दौरान 325 सौदे हुए, जिनका कुल मूल्य 8.4 अरब डॉलर रहा। सौदों की संख्या में 22 प्रतिशत और कुल मूल्य में आठ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी। इसके बावजूद औसत सौदे का आकार बढ़ा, जिससे पता चलता है कि निवेशकों ने उच्च विकास क्षमता वाली बड़ी कंपनियों में निवेश जारी रखा। इस तिमाही में चार नयी यूनिकॉर्न कंपनियां भी उभरीं।
क्षेत्रवार देखें तो रिटेल एवं उपभोक्ता क्षेत्र में सबसे अधिक 95 सौदे हुए। इसके बाद आईटी एवं आईटीईएस में 80 और बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं में 62 सौदे दर्ज किये गये।
