शिमला, 20 जून (वार्ता) हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार लोक निर्माण विभाग को मजबूत और तकनीक-संचालित बनाने के लिए व्यापक सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि यह विभाग भविष्य के बुनियादी ढांचे और आपदा से जुड़ी चुनौतियों का सामना प्रभावी ढंग से कर सके।
“लोक निर्माण विभागों में गुणवत्ता आश्वासन” पर यहां आयोजित उत्तर क्षेत्र अंतर-राज्यीय संवादात्मक सत्र को संबोधित करते हुए श्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने पिछले तीन वर्षों में कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है। राज्य में संपर्क तथा बुनियादी ढांचे को बहाल करने में पीडब्ल्यूडी की भूमिका सराहनीय रही है। इस सत्र में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों और इंजीनियरों ने भाग लिया।
सत्र को लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी संबोधित किया और कहा कि क्षमता निर्माण और आधुनिक तकनीकों को अपनाना समय की मांग है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव हिमाचल प्रदेश पर पहले से ही दिखाई दे रहा है। आने वाले वर्षों में अन्य राज्यों को भी ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य का लगभग 90 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र पहाड़ी होने के कारण सड़क संपर्क एक बुनियादी आवश्यकता बनी हुई है।
श्री सुक्खू ने कहा कि पीडब्ल्यूडी को पारंपरिक सड़क निर्माण से आगे बढ़कर सुरंग निर्माण और गगनचुंबी इमारतों सहित उन्नत बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों और आधुनिक कार्य प्रणालियों को अपनाना चुनौतीपूर्ण है। सतत विकास के लिए आधुनिक तकनीक आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदाओं से क्षतिग्रस्त हुए बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण भविष्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सकल घरेलू उत्पाद का लगभग चार प्रतिशत आपदा पुनर्निर्माण पर खर्च किया जा रहा है। यह आंकड़ा 2050 तक बढ़कर 14 प्रतिशत हो सकता है। इससे स्पष्ट है कि आधुनिक तकनीक और विभागीय क्षमताओं को बढ़ाने की सख्त जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि सरकार पीडब्ल्यूडी के दायरे को व्यापक बनाने पर विचार कर रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि विभाग बांध निर्माण और अन्य प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं जैसे उभरते क्षेत्रों में बड़ी भूमिका निभा सकता है। इस अवसर पर श्री सुक्खू ने “क्वालिटी कंट्रोल फॉर रोड वर्क्स” नामक पुस्तक का विमोचन किया।
श्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि क्षमता निर्माण और आधुनिक तकनीकों को अपनाना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवादात्मक सत्र इंजीनियरों को नवीन तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं की बहुमूल्य जानकारी प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 45,000 किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है। राज्य की अधिकांश पंचायतें सड़कों से जुड़ी हैं। इस विशाल तंत्र का स्थायी रूप से रखरखाव करना एक बड़ी चुनौती है। इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने एक नई जल निकासी नीति तैयार की है। इस नीति का उद्देश्य सड़कों के रखरखाव और उनकी उम्र में सुधार करना है।
