जबलपुर: जबलपुर से मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के लिए रवाना होने वाली 11187 गरीब रथ एक्सप्रेस शनिवार शाम एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही के कारण चर्चा का विषय बन गई। ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुंची तो यात्रियों को पता चला कि उनकी बुकिंग वाला जी-9 कोच ट्रेन में मौजूद ही नहीं है। अचानक सामने आई इस चूक से स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और यात्रियों में भारी नाराजगी देखने को मिली।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में रेलवे के जिम्मेदार अधिकारियों को भी यह जानकारी नहीं थी कि ट्रेन से एक पूरा कोच गायब है। जब यात्रियों ने आरक्षण चार्ट का मिलान किया और अपने कोच की तलाश शुरू की, तब मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया। इसके बाद रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया और कोच को तत्काल जोड़ने की कवायद शुरू की गई। इस पूरी प्रक्रिया के चलते ट्रेन लगभग एक घंटे की देरी से रवाना हो सकी, जिससे सैकड़ों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
लगाना भूल गया स्टाफ
सूत्रों के अनुसार, जी-9 कोच को तकनीकी मेंटेनेंस के लिए पहले ट्रेन से अलग किया गया था। लेकिन मरम्मत के बाद उसे दोबारा ट्रेन में जोड़ने की अनिवार्य प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रेन को प्लेटफॉर्म पर भेजने से पहले डिब्बों की अंतिम जांच और सत्यापन क्यों नहीं किया गया। यदि निर्धारित प्रक्रिया का सही ढंग से पालन होता, तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती। बताया जाता है कि बाद में ट्रेन के एक हिस्से को वापस कोचिंग डिपो ले जाकर गायब कोच जोड़ा गया। इस दौरान प्लेटफॉर्म पर यात्री अपने सामान के साथ इधर-उधर भटकते रहे और रेलवे कर्मचारियों से जवाब मांगते रहे।
यह पूरा घटनाक्रम रेलवे की परिचालन व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। रेलवे की मानक प्रक्रिया के अनुसार किसी भी ट्रेन को रवाना करने से पहले उसके सभी कोचों की संख्या, क्रम और तकनीकी स्थिति का मिलान किया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अंतिम निरीक्षण के दौरान यह गंभीर चूक कैसे नजरअंदाज हो गई। यदि समय रहते यात्रियों ने आपत्ति नहीं जताई होती, तो ट्रेन बिना जी-9 कोच के ही रवाना हो सकती थी। यात्रियों का कहना है कि रेलवे को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि लापरवाही किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। साथ ही दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में यात्रियों को इस तरह की अव्यवस्था और असुविधा का सामना न करना पड़े।
