
खंडवा। चेक के माध्यम से होने वाले वित्तीय लेन-देन में लापरवाही भारी पड़ सकती है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, खंडवा श्री अरविंद सिंह ने परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के एक मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए 6 माह के साधारण कारावास तथा परिवादी को ₹4,60,230 प्रतिकर देने का आदेश दिया है।
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि धारा 138 का उद्देश्य चेक के माध्यम से होने वाले वित्तीय लेन-देन की विश्वसनीयता बनाए रखना, व्यापारिक एवं सामाजिक व्यवहार में विश्वास कायम रखना तथा चेक प्राप्तकर्ता को आर्थिक हानि से संरक्षण प्रदान करना है। यदि वैध देयता के निर्वहन के लिए जारी किया गया चेक बैंक खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण अनादृत हो जाता है और विधिसम्मत नोटिस मिलने के बाद भी भुगतान नहीं किया जाता, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध न्यायालयीन कार्रवाई की जा सकती है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट अरविंद सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में चेक के माध्यम से लेन-देन लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्रत्येक खाताधारक का दायित्व है कि चेक जारी करने से पहले अपने खाते में पर्याप्त धनराशि सुनिश्चित करे। ऐसा नहीं करने पर चेक बाउंस होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति को कारावास, प्रतिकर एवं अन्य कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने नागरिकों से वित्तीय लेन-देन में सावधानी, जिम्मेदारी और कानून के प्रावधानों का पालन करने की अपील की है, ताकि अनावश्यक कानूनी विवादों से बचा जा सके।
