खेती पर मौसम का संकट, कृषि मौसम सेवा ठप

बड़वानी, मध्यप्रदेश में मानसून दस्तक दे चुका है। जुलाई का पहला सप्ताह शुरू हो रहा है, लेकिन जिले में अब तक झमाझम बारिश नहीं हुई। हजारों किसान आसमान ताक रहे हैं ताकि खरीफ की बोवनी शुरू हो सके। जिस दौर में हर घंटे का मौसम खेती की दिशा तय करता है, उस वक्त जिले की सबसे जरूरी कृषि मौसम सेवा पिछले तीन माह से बंद पड़ी है।

तलून स्थित जिला कृषि मौसम इकाई और ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन बंद होने से किसानों को स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक पूर्वानुमान नहीं मिल रहा। बारिश कब और कितनी होगी, तेज हवा, पाला, तुषार या पश्चिमी विक्षोभ का असर रहेगा या नहीं, यह जानकारी समय पर नहीं मिल पा रही।

किसान पूरी तरह अनुमान पर खेती करने को मजबूर हैं। 2018 में तलून कृषि विज्ञान केंद्र में मौसम केंद्र की स्वीकृति मिली और वर्ष 2019 में शुरू हुई यह इकाई कंट्रोल रूम जैसी थी। हर घंटे मौसम के आंकड़े जुटाकर फसलवार सलाह दी जाती थी। वर्ष 2024 में केंद्र सरकार ने प्रदेश के 199 केंद्रों पर संचालित सेवा बंद कर दी थी। विभाग द्वारा न्यायालय के दो साल के स्थगन मिलने के 2 साल बाद अवधि खत्म होते ही मौसम सेवाएं फिर बंद कर दी गई। अब न स्थानीय पूर्वानुमान है, न वैज्ञानिक सलाह। किसानों ने सेवा फिर शुरू करने की मांग की है।

तलून का ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन 24 घंटे मौसम पर नजर रखता था। यहां से तापमान, अधिकतम-न्यूनतम तापमान, वर्षा की मात्रा, हवा की गति-दिशा, वायुमंडलीय आद्र्रता, मिट्टी का तापमान, मिट्टी की नमी और धूप की अवधि दर्ज होती थी। इन आंकड़ों के आधार पर कृषि वैज्ञानिक फसलवार सलाह तैयार करते थे। स्टेशन बंद होने से यह पूरी व्यवस्था ठप है। अब किसानों को न बारिश का सही अंदाजा मिल रहा, न सिंचाई और दवा छिडक़ाव का समय तय हो पा रहा।

तलवाड़ा बुजुर्ग के किसान शंकर बरफा, कैलाश मुकाती, मोहन लाला, परमानंद चौधरी का कहना है कि सरकार डिजिटल कृषि की बात करती है, लेकिन जरूरी मौसम सेवा ही बंद कर दी। बिना स्थानीय जानकारी के वैज्ञानिक खेती संभव नहीं। किसानों ने मांग की है कि तलून की कृषि मौसम इकाई और वेदर स्टेशन तुरंत शुरू किया जाए, ताकि खरीफ, रबी दोनों सीजन में समय पर पूर्वानुमान और फसलवार सलाह मिल सके।

पहले कृषि मौसम इकाई से हर मंगलवार और शुक्रवार को एडवाइजरी जारी होती थी। इसमें अगले पांच दिनों का पूर्वानुमान और 12 घंटे की नाऊकास्ट रहती थी। इसके आधार पर बताया जाता था कि बुआई कब करें, सिंचाई रोके या करे, कीटनाशक-उर्वरक का छिडक़ाव कब करें, कटाई का सही समय क्या है। तेज बारिश या हवा से फसल बचाने के उपाय भी बताए जाते थे। इससे खर्च कम होता था और नुकसान घटता था।

कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि मौसम आधारित सलाह नहीं मिलने से किसान गलत समय पर सिंचाई, दवा या उर्वरक का उपयोग कर देते हैं। इससे लागत बढ़ती है और उत्पादन घटता है। पाला, तुषार और तेज हवाओं की समय पर चेतावनी नहीं मिलने से फसलों को नुकसान की आशंका भी बढ़ जाती है। मौसम आधारित कृषि योजनाओं का लाभ भी किसानों तक ठीक से नहीं पहुंच पा रहा है। जिला कृषि मौसम इकाई बंद होने के बाद मौसम की जानकारी भोपाल और राष्ट्रीय स्तर से जारी हो रही है। किसान कहते हैं कि यह जानकारी संभाग या प्रदेश के हिसाब से होती है। कई बार जिले में मौसम का मिजाज अलग रहता है। ऐसे में सटीक चेतावनी नहीं मिलने से कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अचानक बारिश या तेज हवा आने पर किसान फसल की सुरक्षा नहीं कर पाते।

 

लागत बढ़ेगी और नुकसान का खतरा रहेगा

 

मौसम सेवा बंद होने से किसान सबसे ज्यादा खरीफ की बुआई, सिंचाई, दवा-उर्वरक छिडक़ाव, नर्सरी तैयार करने, दलहन-तिलहन की बोनी और कटाई में परेशान हैं। समय पर बारिश की जानकारी नहीं मिलने से कई किसान बुआई टाल रहे हैं। कुछ ने बौनी कर दी है। अचानक तेज बारिश या लंबा सूखा पड़ा तो दोबारा बुआई करनी पड़ेगी। इससे लागत बढ़ेगी और नुकसान का खतरा रहेगा।

 

सुधार होने पर जानकारी की जाएगी सांझा

 

डॉ रविन्द्रसिंह सिकरवार, कृषि एवं मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन बंद होने से सटीक पूर्वानुमान और नाऊकास्ट की जानकारी जिले से जारी नहीं हो रही। यह जानकारी भोपाल से दी जा रही है। स्टेशन बंद होने की सूचना भोपाल कार्यालय को दी गई है। सुधार होने पर जानकारी सांझा की जाएगी।

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