वाशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्म के आधार पर नागरिकता (बर्थराइट सिटीजनशिप) देने के कानून पर तीखी असहमति जताई है। नॉर्थ डकोटा में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि यह संवैधानिक प्रावधान मूल रूप से गृहयुद्ध के बाद केवल गुलामों के बच्चों को अधिकार देने के लिए बनाया गया था। ट्रंप का मानना है कि इसका लाभ उठाकर अमीर विदेशी अब अनुचित फायदा उठा रहे हैं, जिसे अब पूरी तरह बंद किया जाना चाहिए।
राष्ट्रपति शक्तियों और मेरिट पर जोर
ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का स्वागत करते हुए कहा कि इनसे राष्ट्रपति के अधिकार पहले से अधिक मजबूत हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के भविष्य के लिए राष्ट्रपति के पास पर्याप्त शक्तियां होनी आवश्यक हैं। उन्होंने संकेत दिया कि उनकी सरकार अब भविष्य की नीतियों को ‘मेरिट’ यानी योग्यता के आधार पर तय करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, ताकि इमिग्रेशन से जुड़े नियमों को अधिक कड़ा और प्रभावी बनाया जा सके।
राजनीतिक बहस और भविष्य की चुनौतियां
जन्मसिद्ध नागरिकता का मुद्दा अमेरिका में दशकों से कानूनी और राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है। जहां राष्ट्रपति ट्रंप इस जटिल व्यवस्था में बड़े बदलावों की वकालत कर रहे हैं, वहीं उनके विरोधी इसे अमेरिकी संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार मानते हैं। आने वाले समय में इस मुद्दे पर अमेरिकी राजनीति में बड़ी हलचल और टकराव देखने को मिल सकता है, क्योंकि यह कानून प्रवासियों और भविष्य की नागरिकता नीतियों के लिए बेहद निर्णायक साबित होगा।

