सतना : हर साल 1 जुलाई को देश के महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. विधानचंद्र राय की याद में राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाया जाता है. यह दिन उन हाथों को सलाम करने का है जो निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा में जुटे हैं.इस खास मौके पर, नवभारत संवाददाता गुरुदत्त तिवारी ने वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शशि धर गर्ग अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज सतना के डीन से उनकी इस यात्रा, चुनौतियों और बदलते दौर में डॉक्टर मरीज़ के रिश्ते पर खास बातचीत की.सवाल : आपके लिए एक डॉक्टर होने के क्या मायने हैं?
डॉ. गर्ग : बहुत-बहुत धन्यवाद मेरे लिए डॉक्टर होना सिर्फ एक पेशा या आजीविका कमाने का साधन नहीं है, बल्कि यह एक कॉलिंग (ईश्वरीय बुलावा) है. जब एक मरीज़ दर्द में आपके पास आता है, तो वह केवल अपनी बीमारी लेकर नहीं आता, बल्कि एक अटूट विश्वास लेकर आता है.उस विश्वास पर खरा उतरना और किसी को नया जीवन या दर्द से राहत देना, दुनिया का सबसे संतोषजनक अहसास है.
सवाल : डिजिटल युग में, जब लोग इंटरनेट पर अपनी बीमारी सर्च करके पहले ही पैनिक (परेशान) हो जाते हैं, तो एक डॉक्टर के रूप में आपके सामने क्या चुनौतियाँ आती हैं?
डॉ. गर्ग: (मुस्कुराते हुए) आपने बिल्कुल सही और आज के समय का सबसे बड़ा मुद्दा उठाया है। इसे हम साइबरकोंड्रिया कहते हैं.लोग सिरदर्द को भी इंटरनेट पर सर्च करके ब्रेन ट्यूमर समझ बैठते हैं. यह सामान्य स्वास्थ्य के लिए आत्महत्या से कम नहीं होगा.उन्होंने बताया कि इंटरनेट पर जानकारी है, लेकिन ज्ञान और अनुभव नहीं.हम डॉक्टरों को अब केवल बीमारी का इलाज नहीं करना पड़ता, बल्कि पहले मरीज़ के दिमाग से उस आधे-अधूरे ज्ञान और डर को डिलीट करना पड़ता है. मरीज़ों से मेरी गुजारिश है कि वे अपनी सेहत का फैसला इंटरनेट के भरोसे न छोड़ें.
सवाल :पिछले कुछ सालों में इलाज के दौरान डॉक्टरों के साथ मरीज और उनके परिजनों के अप्रिय बर्ताव की घटनाएं सामने आई हैं। इससे डॉक्टरों के मनोबल पर क्या असर पड़ता है?
डॉ. गर्ग : यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है.कोई भी डॉक्टर जानबूझकर किसी मरीज़ को नुकसान नहीं पहुँचाता. चिकित्सा विज्ञान की अपनी सीमाएं हैं और हर डॉक्टर अपनी तरफ से शत-प्रतिशत प्रयास करता है.जब हिंसा होती है, तो युवा डॉक्टरों का मनोबल टूटता है और वे क्रिटिकल (गंभीर) मामलों में रिस्क लेने से डरने लगते हैं.डॉक्टर और मरीज़ के बीच विश्वास का रिश्ता होना बहुत जरूरी है, भय का नहीं.
सवाल : आपके जीवन का कोई ऐसा किस्सा, जिसने आपको अंदर तक झकझोर दिया हो या जिसे आप कभी नहीं भूल सकते?
डॉ. गर्ग: ऐसे कई किस्से हैं, लेकिन एक वाकया हमेशा याद रहता है। कुछ साल पहले पोस्टमार्टम करते समय बेहद गंभीर स्थिति थी यहाँ की उसके प्राइवेट पार्ट तक में कई वार किए गए वह दृश्य काफ़ी भयावह था
सवाल : वर्तमान की भागदौड़ भरी जिंदगी में युवा डॉक्टरों और आम लोगों को आप क्या हेल्थ टिप्स देना चाहेंगे?
डॉ. गर्ग : डेली लाइफस्टाइल में लोग अपनी सेहत को सबसे आखिरी पायदान पर रखते हैं. मेरा मूल मंत्र बेहद सरल है.इसके चार आधार हैं.30 मिनट का नियम: रोज कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज या वॉक जरूर करें.नींद से समझौता नहीं: 7-8 घंटे की गहरी नींद आपके शरीर के लिए रीबूट बटन की तरह है.मानसिक स्वास्थ्य: शारीरिक सेहत के साथ-साथ मानसिक शांति भी जरूरी है। तनाव से दूर रहें.
नियमित जांच: 35-40 की उम्र के बाद साल में एक बार बेसिक हेल्थ चेकअप जरूर करवाएं.
सवाल : डॉक्टर दिवस के अवसर पर देश के नागरिकों और युवा मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए आपका क्या संदेश है?
डॉ. गर्ग : युवा मेडिकल छात्रों से मैं यही कहूँगा कि इस पेशे में सहानुभूति को कभी कम मत होने देना.किताबी ज्ञान आपको एक अच्छा डॉक्टर बना सकता है, लेकिन एक संवेदनशील दिल आपको एक महान डॉक्टर बनाएगा और आम जनता से बस यही अपील है कि डॉक्टरों पर भरोसा रखें हम आपके दुश्मन नहीं, आपके रक्षक हैं.
सवाल : इस समय कौन सी स्वास्थ्य समस्याएं या बीमारियां सबसे ज्यादा देखने को मिल रही हैं, और उनकी मुख्य वजह क्या है?
डॉ. गर्ग: वर्तमान समय में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं,जिनमे से पीलिया,मोटापा और डायबिटीज,हाई बीपी ,दिल की बीमारियां,फैटी लिवर,तनाव और डिप्रेशन,सांस की बीमारियां और दूषित पानी के कारण गंभीर बीमारियां हो रही है
