
जबलपुर। महिला की हत्या के आरोप में सजा से दंडित सास, पति तथा देवर को हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस ए के सिंह ने सजा के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई के दौरान पाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतक महिला के शरीर में चोट के निशान नहीं है, यह घटना सुसाइड भी हो सकती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा डॉक्टर सहित अन्य गवाह के विरोधाभासी बयान होने के कारण युगलपीठ ने आजीवन कारावास की सजा को निरस्त करते हुए अपीलकर्ताओं को दोषमुक्त कर दिया।
सागर के बांदा जिला निवासी प्रताप सिंह तथा उसके बेटे छतर सिंह लोधी और लक्खू उर्फ लखन सिंह के द्वारा हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा से दंडित किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गयी थी। अभियोजन के अनुसार छतर सिंह लोधी की पत्नी भारती सिंह को आग लगने के कारण उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था। आरोपियों ने महिला पर केरोसिन का तेल डालकर आग लगा दी थी। याचिकाकर्ताओं की तरफ से तर्क दिया गया कि गवाहो व पोस्टमार्टम रिपोर्ट से डॉक्टरों के बयानों में विरोधाभास है।
युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि मृतिका के पिता ने एक बयान में कहा है कि उसकी बेटी ने स्वयं आग लगी है। दूसरे बयान में कहा है कि आरोपियों ने आग लगाई है। इसके अलावा पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर के बयान भी रिपोर्ट से भिन्न है। उसने खुद माना है कि महिला कि शरीर में चोट नहीं थी, इसलिए घटना सुसाइड की हो सकती है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद दोषसिद्धि के आदेश को निरस्त कर दिया।
